दीया मिर्जा ने साझा की अपने करियर की कठिनाइयाँ: 24 साल की उम्र में लिया था बड़ा फैसला!
दीया मिर्जा का आत्म-खोज का सफर
मुंबई, 5 जून। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री दीया मिर्जा ने हाल ही में अपने जीवन के एक ऐसे मोड़ के बारे में बताया, जब वह अपने करियर की ऊंचाइयों पर होते हुए भी अंदर से अधूरी महसूस कर रही थीं। सोहा अली खान के पॉडकास्ट 'ऑल अबाउट हर' में दीया ने साझा किया कि केवल 24 वर्ष की आयु में उन्होंने दो साल का ब्रेक लेने का निर्णय किया।
पॉडकास्ट में दीया ने अपने करियर, व्यक्तिगत जीवन और उन भावनाओं के बारे में खुलकर बात की, जिनका सामना उन्होंने कम उम्र में किया।
उन्होंने कहा, ''मैंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा मॉडलिंग और अभिनय में बिताया, लेकिन एक समय ऐसा आया जब मुझे अपने काम और अपने विचारों के बीच का अंतर स्पष्ट होने लगा।''
दीया ने आगे कहा, ''मॉडलिंग में मेरा मुख्य कार्य उत्पादों और ब्रांड्स को लोगों तक पहुंचाना था। हालांकि, यह मेरे पेशे का हिस्सा था, लेकिन समय के साथ मुझे यह महसूस हुआ कि मैं जिन मूल्यों को मानती हूं, वे मेरे काम में नहीं दिख रहे थे। कई बार मुझे अपने किरदारों से कोई संबंध नहीं महसूस होता था। मेरे मन में सवाल उठने लगे कि मैं अपने काम के माध्यम से किस चीज़ का प्रतिनिधित्व कर रही हूं और मेरी असली पहचान क्या है।''
अभिनेत्री ने कहा, ''यह आंतरिक संघर्ष धीरे-धीरे बढ़ता गया। बाहर से सब कुछ सही लग रहा था। मेरे पास सफलता, पैसा और मुंबई जैसे बड़े शहर में अपना घर था। मैं आर्थिक रूप से स्वतंत्र थी और रोजमर्रा के खर्चों की चिंता नहीं थी। लेकिन इन सबके बावजूद, मुझे संतोष नहीं मिल रहा था। मुझे लगने लगा कि जिस काम में मैं लगी हुई हूं, वह मुझे खुशी नहीं दे रहा है।''
दीया ने कहा, ''आखिरकार, मैंने 2005 में एक बड़ा निर्णय लिया। मैंने अपने करियर के सबसे महत्वपूर्ण समय में दो साल का ब्रेक लेने का फैसला किया। उस समय मेरी उम्र केवल 24 साल थी। फिल्म इंडस्ट्री में यह उम्र किसी भी कलाकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यही वह समय होता है जब करियर तेजी से आगे बढ़ता है।''
उन्होंने कहा, ''यह ब्रेक मेरे लिए केवल काम से दूरी बनाने का समय नहीं था, बल्कि खुद को फिर से समझने और पहचानने की यात्रा थी। यह अपने घर लौटने जैसा अनुभव था। इस समय ने मुझे यह समझने में मदद की कि जीवन में केवल नाम, पैसा और लोकप्रियता ही सब कुछ नहीं है। असली खुशी तब मिलती है जब इंसान अपने काम, विचारों और उद्देश्य के साथ जुड़ाव महसूस करे।''
दीया ने कहा, ''इस आत्ममंथन के दौरान मैंने अपने भीतर झांकने का मौका पाया। मुझे किस तरह का काम करना पसंद है और जीवन में आगे किस दिशा में बढ़ना है, इस पर विचार किया। मैंने अपने करियर को नए नजरिए से देखा और ऐसे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने की कोशिश की, जो मेरे विचारों और मूल्यों के करीब हों।''
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