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जावेद अख्तर का जन्मदिन: हनी ईरानी के साथ अधूरी प्रेम कहानी

जावेद अख्तर, भारतीय सिनेमा के प्रमुख लेखकों में से एक, आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। उनकी व्यक्तिगत जिंदगी, विशेषकर उनकी पहली पत्नी हनी ईरानी के साथ की अधूरी प्रेम कहानी, हमेशा चर्चा का विषय रही है। जानें कैसे ताश के खेल से शुरू हुई उनकी मोहब्बत, और कैसे जावेद की सफलता ने उनके रिश्ते को प्रभावित किया। हनी ने कभी भी मीडिया में जावेद या शबाना के खिलाफ कुछ नहीं कहा और अपनी गरिमा बनाए रखी। इस लेख में हम उनकी कहानी के अनछुए पहलुओं पर रोशनी डालेंगे।
 
जावेद अख्तर का जन्मदिन: हनी ईरानी के साथ अधूरी प्रेम कहानी

जावेद अख्तर का जन्मदिन

जावेद अख्तर का जन्मदिन: भारतीय सिनेमा के प्रमुख लेखकों और गीतकारों में से एक, जावेद अख्तर आज अपने जन्मदिन का जश्न मना रहे हैं। उनकी लेखनी ने कई दिलों को छुआ है, लेकिन उनकी व्यक्तिगत जिंदगी भी हमेशा चर्चा का विषय रही है। जबकि लोग उन्हें और शबाना आजमी को एक आदर्श जोड़ी मानते हैं, उनकी पहली पत्नी हनी ईरानी की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। हनी खुद एक प्रतिभाशाली लेखिका और अभिनेत्री रही हैं, लेकिन आजकल वह मीडिया की नजरों से दूर हैं। आइए, जानते हैं जावेद और हनी की अधूरी प्रेम कहानी के बारे में…


ताश के खेल से शुरू हुई मोहब्बत

जावेद अख्तर और हनी ईरानी की पहली मुलाकात 1972 में फिल्म 'सीता और गीता' के सेट पर हुई थी। उस समय जावेद एक उभरते लेखक थे और हनी एक सहायक अभिनेत्री। कहा जाता है कि उनके बीच प्यार की शुरुआत ताश के खेल के दौरान हुई। हनी के अनुसार, 'जावेद सेट पर सभी के साथ रमी खेलते थे। एक बार खेल के दौरान उन्होंने 100-200 रुपये हार दिए। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं उनके लिए एक कार्ड निकालूं। मैंने उनके लिए एक अच्छा कार्ड निकाला और वे जीत गए। उन्होंने मुझसे कहा, 'तुमने मेरे लिए इतना अच्छा कार्ड खींचा है, मुझे लगता है कि हम एक-दूसरे के लिए बने हैं' और फिर उन्होंने मुझसे शादी के लिए प्रपोज किया।'


1972 में हुई शादी

हनी उस समय जावेद से काफी छोटी थीं। जब जावेद ने हनी का हाथ उनके परिवार से मांगा, तो उन्हें प्रारंभ में विरोध का सामना करना पड़ा। लेकिन जावेद के आत्मविश्वास और प्रतिभा को देखते हुए परिवार ने अंततः सहमति दे दी। 1972 में दोनों ने निकाह कर लिया। शादी के शुरुआती दिन बेहद साधारण थे, उनके पास रहने के लिए अपना घर भी नहीं था, लेकिन उनके बीच का प्यार सब कुछ संभाल लेता था। इस शादी से उनके दो बच्चे, फरहान और जोया, हुए।


जावेद अख्तर का तलाक

70 के दशक के अंत तक जावेद अख्तर की सफलता ने उन्हें ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। इसी दौरान शबाना आजमी उनके जीवन में आईं। जब हनी को जावेद और शबाना के बीच बढ़ती नजदीकियों की खबर मिली, तो घर में तनाव बढ़ गया। कई प्रयासों के बावजूद जब बात नहीं बनी, तो 1984 में जावेद और हनी ने अलग होने का निर्णय लिया।


हनी ईरानी का लाइमलाइट से दूर रहना

हनी ईरानी ने कभी भी मीडिया में जावेद या शबाना के खिलाफ कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं की। उन्होंने अपनी गरिमा बनाए रखी और चुपचाप जावेद के जीवन से बाहर निकल गईं। 1984 में जावेद और शबाना ने शादी कर ली। हनी ने अकेले ही फरहान और जोया की परवरिश की और उन्हें सफल बनाया। आज जावेद और शबाना हर बड़े इवेंट का हिस्सा होते हैं, जबकि हनी ईरानी लाइमलाइट से दूर अपनी निजी जिंदगी में खुश हैं।


एक सफल लेखिका के रूप में पहचान

हालांकि हनी ईरानी ने अभिनय छोड़ दिया और लाइमलाइट से दूर रहना पसंद किया, लेकिन उन्होंने लेखन में अपनी एक अलग पहचान बनाई। 'लम्हे', 'आइना', 'डर' और 'कहो ना प्यार है' जैसी सफल फिल्मों की स्क्रिप्ट हनी ने ही लिखी थी। आज भी वे बॉलीवुड की सबसे सम्मानित पटकथा लेखिकाओं में से एक मानी जाती हैं, भले ही वे कैमरों के सामने आना पसंद न करती हों।


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