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चंकी पांडे की जिंदगी का अनकहा किस्सा: बाथरूम में फंसने से मिली फिल्मी दुनिया की पहचान!

चंकी पांडे, हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता, ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए हैं। उनका सफर एक दिलचस्प घटना से शुरू हुआ, जब वह एक शादी की पार्टी में बाथरूम में फंस गए थे। इस घटना ने उन्हें फिल्म निर्माता पहलाज निहलानी से मिलवाया, जिसने उनके करियर को एक नई दिशा दी। जानें कैसे चंकी ने अपने संघर्षों को पार करते हुए बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई और आज भी दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं।
 

चंकी पांडे का फिल्मी सफर


मुंबई, 25 सितंबर। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के अभिनेता चंकी पांडे ने अपने चार दशकों के करियर में कई विविध किरदार निभाए हैं। 80 और 90 के दशक में वह हीरो और सहायक अभिनेता के रूप में नजर आए। बाद में, कॉमेडी और नकारात्मक भूमिकाओं ने उन्हें एक नई पहचान दिलाई। 'तेजाब', 'आंखें', 'पाप की दुनिया' और 'हाउसफुल' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने सराहा। चंकी की फिल्मी यात्रा की शुरुआत भी दिलचस्प रही। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि उनकी पहली फिल्म से पहले एक ऐसा वाकया हुआ, जिसे वह आज भी याद करते हैं।


चंकी पांडे का जन्म 26 सितंबर 1962 को मुंबई में हुआ। उनका असली नाम सुयश पांडे है। उनके पिता, डॉ. शरद पांडे, एक प्रसिद्ध हार्ट सर्जन थे। चंकी ने अपने पिता की तरह डॉक्टर बनने की कोशिश की, लेकिन पढ़ाई में असफल रहने के कारण यह सपना पूरा नहीं हो सका। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने मॉडलिंग की और अपने खर्च के लिए पुरानी कारें और घर का सामान बेचने जैसे काम भी किए।


फिल्मों में कदम रखने से पहले चंकी ने कई ऑडिशन दिए, लेकिन हर बार उन्हें यही कहा गया कि वह उन किरदारों के लिए उपयुक्त नहीं हैं। इसी दौरान उनकी मुलाकात फिल्म निर्माता पहलाज निहलानी से हुई, जो उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। चंकी ने बताया कि एक बार वह एक फाइव स्टार होटल में शादी की पार्टी में गए थे। उन्होंने चुड़ीदार पायजामा पहना था, जिसमें नाड़ा फंस गया और वह उसे खोल नहीं पा रहे थे।


चंकी ने कहा, "मेरी एक समस्या है, मैं नाड़ा बांध सकता हूं लेकिन खोल नहीं पाता। मैंने थोड़ी ज्यादा बीयर पी ली थी और मदद के लिए चिल्ला रहा था। तभी पहलाज निहलानी आए और मेरी मदद की।" उन्होंने आगे बताया कि हमारी बातचीत के दौरान निहलानी ने पूछा कि वह क्या करते हैं। चंकी ने कहा कि वह मॉडल हैं और फिल्मों में काम पाने की कोशिश कर रहे हैं। निहलानी ने उन्हें अगले दिन अपने ऑफिस बुलाया और फिल्म 'आग ही आग' का ऑफर दिया।


चंकी ने 1987 में 'आग ही आग' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बाद वह 'पाप की दुनिया' में नजर आए। 1988 में आई 'तेजाब' ने उनके करियर को नई दिशा दी। इस फिल्म में अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिका में थे, और चंकी ने अनिल के दोस्त बब्बन का किरदार निभाया, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए नॉमिनेशन मिला।


इसके बाद चंकी ने 'विश्वात्मा', 'लुटेरे', 'आंखें', 'डॉन' और कई अन्य फिल्मों में काम किया। 90 के दशक के मध्य में जब बॉलीवुड में फिल्मों का तरीका बदलने लगा और उन्हें मनपसंद रोल्स कम मिलने लगे, तो उन्होंने बांग्लादेश की फिल्मों में काम करना शुरू किया। वहां उन्होंने लगभग सात-आठ साल काम किया। बाद में, पत्नी भावना के कहने पर वह बॉलीवुड लौट आए।


बॉलीवुड में वापसी के बाद चंकी ने अपने किरदारों को लेकर एक नया रास्ता चुना। 'हाउसफुल' सीरीज में उनका पास्ता वाला किरदार काफी लोकप्रिय हुआ। इसके बाद 'बेगम जान', 'साहो' और 'अभय 2' जैसे प्रोजेक्ट्स में उन्होंने विभिन्न प्रकार की भूमिकाएं निभाईं। चंकी ने एक इंटरव्यू में कहा कि अब वह सिर्फ हीरो बनने के पीछे नहीं भागते, बल्कि ऐसे रोल करना चाहते हैं जो दर्शकों के दिलों में बस जाएं।


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