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क्या है लोहड़ी का असली मतलब? विकास खन्ना ने साझा की अपनी यादें

सेलेब्रिटी शेफ विकास खन्ना ने लोहड़ी के त्योहार की अपनी यादों को साझा किया है। उन्होंने बताया कि यह त्योहार केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह परिवार के प्यार और खेतों की खुशबू का प्रतीक है। विकास ने अपने बचपन की लोहड़ी की शामों का जिक्र करते हुए कहा कि यह अनुभव केवल खाने का नहीं, बल्कि जीवन का सम्मान करने का तरीका है। जानें इस खास त्योहार के बारे में और विकास खन्ना के पसंदीदा व्यंजन के बारे में।
 
क्या है लोहड़ी का असली मतलब? विकास खन्ना ने साझा की अपनी यादें

विकास खन्ना की लोहड़ी की यादें




मुंबई, 13 जनवरी। बॉलीवुड और कुकिंग की दुनिया में अपनी अनोखी पहचान बनाने वाले सेलेब्रिटी शेफ विकास खन्ना ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपने बचपन की लोहड़ी की यादों को साझा किया। अमृतसर में पले-बढ़े विकास ने बताया कि उनके लिए लोहड़ी और अन्य फसल से जुड़े त्योहार केवल उत्सव नहीं थे, बल्कि ये जीवन के अनुभव को बदलने वाले क्षण होते थे।


उन्होंने कहा, ''बचपन में लोहड़ी की शामें एक जादुई अनुभव होती थीं। घर में जलती आग, लोक गीतों की मधुर धुन और मां द्वारा बनाई गई मिठाइयों की खुशबू पूरे वातावरण को महका देती थी। रेवड़ी, गजक, मूंगफली और गुड़ की सुगंध आज भी मेरे दिल में बसी हुई है। यह केवल खाने का अनुभव नहीं था, बल्कि त्योहार की भावना और परिवार के प्यार का हिस्सा था।''


विकास ने आगे कहा, ''मेरे लिए सबसे खास क्षण खाने से पहले का शांत समय होता था। फसल का त्योहार हमेशा एक प्रार्थना के साथ शुरू होता था, जो गहराई से महसूस की जाती थी। इस अनुभव ने मुझे सिखाया कि हमें खाने का सम्मान करना चाहिए।''


उन्होंने कहा, ''मेरे पसंदीदा त्योहार का व्यंजन हमेशा पंजाब का सरसों का साग और मकई की रोटी रहेगा। यह केवल भोजन नहीं है, बल्कि एक भावना है। यह खेतों की खुशबू, सर्दियों की धूप और परिवार की गर्माहट की याद दिलाता है। हर टुकड़े में लोहड़ी की शामों और मां के प्यार की यादें समाई हुई हैं।''


विकास ने बताया कि भारत के विभिन्न हिस्सों में फसल के त्योहारों के व्यंजन भिन्न हो सकते हैं, जैसे तिल-गुड़, पोंगल, पिठा या पायसम, लेकिन भावना हमेशा समान रहती है। यह आभार की भावना है, जो प्रकृति की उपज, किसानों की मेहनत और पारंपरिक स्वाद का सम्मान करती है। त्योहार केवल स्वादिष्ट भोजन का अवसर नहीं होते, बल्कि ये खाना बनाने की सोच और संस्कृति को भी दर्शाते हैं।


उन्होंने कहा, ''खाना केवल रसोई से नहीं, बल्कि खेतों से आता है। यह हमें याद दिलाता है कि हर व्यंजन में मेहनत, प्रकृति और समय का योगदान होता है। इसलिए हर फसल त्योहार में अनाज, तिल, गुड़ और नई चावल जैसी सामग्री का सम्मान किया जाता है। यह केवल स्वाद का नहीं, बल्कि जीवन का सम्मान करने का तरीका है।''


विकास खन्ना इन दिनों 'मास्टशेफ इंडिया' में नजर आ रहे हैं।


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