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क्या है टाइप-1 डायबिटीज? ऐश्वर्या सखूजा ने साझा किए अपने अनुभव

टीवी की मशहूर अभिनेत्री ऐश्वर्या सखूजा ने टाइप-1 डायबिटीज के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी के साथ जीना कैसे होता है और इसके बारे में जानना क्यों जरूरी है। ऐश्वर्या ने इस बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं, जैसे कि ब्लड शुगर के स्तर को कैसे नियंत्रित किया जाए और इस स्थिति में सामान्य जीवन जीने के लिए क्या करना चाहिए।
 

ऐश्वर्या सखूजा का टाइप-1 डायबिटीज पर जागरूकता अभियान


मुंबई, 10 जुलाई। टेलीविजन की जानी-मानी अभिनेत्री ऐश्वर्या सखूजा ने टाइप-1 डायबिटीज के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस बीमारी के साथ जीना कैसा होता है।


इंस्टाग्राम के माध्यम से, उन्होंने इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास किया। ऐश्वर्या ने कहा कि टाइप-1 डायबिटीज को समझना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि थोड़ी सी जानकारी और सावधानी किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।


एक वीडियो में, ऐश्वर्या ने कहा कि यदि आपका कोई करीबी टाइप-1 डायबिटीज से ग्रसित है, तो उसके बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें जानना आवश्यक है। इस स्थिति में सामान्य जीवन जीना संभव है, लेकिन उनके हालात को समझना और जरूरत पड़ने पर सहायता करना बहुत महत्वपूर्ण है।


उन्होंने बताया कि कभी-कभी लो ब्लड शुगर की स्थिति में व्यक्ति का व्यवहार अचानक बदल सकता है। यदि कोई टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति कांपने लगे या ठीक से बात न कर पाए, तो उसे इंसुलिन की बजाय ग्लूकोज की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में घबराने के बजाय स्थिति को समझने का प्रयास करें।


ऐश्वर्या ने यह भी बताया कि ब्लड शुगर कम होने पर व्यक्ति का मूड बदल सकता है। यदि कोई अचानक गुस्से में आ जाए या अत्यधिक भावुक हो जाए, तो इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लेना चाहिए। यह व्यवहार कभी-कभी ब्लड शुगर के प्रभाव का परिणाम होता है।


उन्होंने यह स्पष्ट किया कि टाइप-1 डायबिटीज वाले लोग क्या खा सकते हैं और क्या नहीं, इस पर कई भ्रांतियाँ हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग हर प्रकार का भोजन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अपने खाने के अनुसार इंसुलिन की मात्रा निर्धारित करनी होती है। इस बीमारी से ग्रसित लोगों को अपने खान-पान और दवाओं का ध्यान रखना आवश्यक है।


अभिनेत्री ने बताया कि इस बीमारी के कारण कई बार योजनाएं अचानक बदलनी पड़ती हैं। ब्लड शुगर कभी भी कम या ज्यादा हो सकता है, इसलिए हर चीज की पहले से योजना बनानी पड़ती है। टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो गलत जीवनशैली के कारण नहीं होती, इसलिए इसके बारे में गलत धारणाएं नहीं बनानी चाहिए।


ऐश्वर्या ने कहा कि टाइप-1 डायबिटीज वाले लोग अक्सर अपने साथ एक छोटी मेडिकल किट रखते हैं, जिसमें इंसुलिन, ग्लूकोज, खाने की चीजें, शुगर मॉनिटरिंग सेंसर और चार्जर जैसी चीजें होती हैं। बाहर जाना, यात्रा करना या छुट्टियों की योजना बनाना उनके लिए सोच-समझकर करना पड़ता है।


एक्सरसाइज के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा कि टाइप-1 डायबिटीज वाले लोगों में व्यायाम के दौरान ब्लड शुगर तेजी से ऊपर या नीचे जा सकता है। इसलिए उन्हें अपनी सेहत और शुगर लेवल को ध्यान में रखकर योजना बनानी पड़ती है।


ऐश्वर्या ने कहा कि इस बीमारी से जूझ रहे लोग पूरे दिन कई गणनाएँ करते रहते हैं। उन्हें खाने में मौजूद कार्बोहाइड्रेट, इंसुलिन की मात्रा और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के बारे में लगातार सोचना पड़ता है। यह एक जिम्मेदारी है, जिसे बाहर से देखने वाले लोग अक्सर नहीं समझ पाते।


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