क्या अकेलापन सिर्फ भीड़ में होता है? शुभांगी अत्रे ने साझा किए अपने अनुभव
शुभांगी अत्रे का अकेलेपन पर नजरिया
मुंबई, 26 जून। टीवी जगत की जानी-मानी अदाकारा शुभांगी अत्रे ने हाल ही में एक बातचीत में अकेलेपन और रिश्तों की वास्तविकता पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि अकेलापन केवल भीड़ में होने से नहीं आता, बल्कि यह भावनात्मक संबंधों और संवाद की कमी से उत्पन्न होता है।
शुभांगी ने कहा, ''मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं, क्योंकि मेरी जिंदगी में कुछ ऐसे लोग हैं, जो मुझसे सच में पूछते हैं, 'आप कैसी हैं?' और मेरे जवाब का इंतजार करते हैं। किसी भी इंसान के लिए सबसे बड़ा सुकून यही होता है कि कोई उसे बिना किसी पूर्वाग्रह के सुनता है। कई बार सलाह से ज्यादा राहत सिर्फ सुनने से मिलती है।''
उन्होंने आगे कहा, "अकेलापन अक्सर इसलिए महसूस होता है क्योंकि लोग एक-दूसरे से बात तो करते हैं, लेकिन वह बातचीत गहरी नहीं होती। आजकल लोग जुड़े रहते हैं, लेकिन उनकी बातचीत अक्सर सतही होती है। ऐसे में इंसान भीड़ में होते हुए भी अकेला महसूस कर सकता है। मेरा मानना है कि एक खुली बातचीत, जिसमें व्यक्ति अपने असली विचार और भावनाएं बिना डर के रख सके, वह कई रिश्तों से ज्यादा कीमती होती है।''
सोशल मीडिया के प्रभाव पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, ''आजकल लोग एक-दूसरे की जिंदगी से वाकिफ होते हैं, लेकिन उनकी भावनाओं से नहीं। हम देख लेते हैं कि सामने वाला क्या कर रहा है, लेकिन यह नहीं जान पाते कि वह अंदर से क्या महसूस कर रहा है। सोशल मीडिया ने लोगों को अधिक दृश्य बना दिया है, लेकिन गहराई कम कर दी है। असली बातचीत अभी भी स्क्रीन से दूर होती है।''
रिश्तों के बारे में उन्होंने कहा, ''आजकल सच्चे और भरोसेमंद रिश्ते बनाना आसान नहीं है। भरोसा और समझ धीरे-धीरे बनते हैं और इसके लिए समय और धैर्य की आवश्यकता होती है। जीवन में वही लोग महत्वपूर्ण होते हैं जो अच्छे और बुरे समय में साथ खड़े रहते हैं। ऐसे रिश्ते ही इंसान को मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं और अकेलेपन को दूर करते हैं।''
अपनी निजी जिंदगी के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, ''मेरी बेटी आशी मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वह 19 साल की हैं और बहुत समझदार हैं। वह हमेशा मेरा हालचाल पूछती हैं और मेरा ख्याल रखती हैं। मेरे कुछ करीबी लोग भी हैं जिनकी वजह से मुझे अकेलापन महसूस नहीं होता।''
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