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कैलाश खेर का गाना 'आज मेरे पिया घर आवेंगे': मोहब्बत नहीं, बल्कि आत्मा का मिलन!

कैलाश खेर का गाना 'आज मेरे पिया घर आवेंगे' एक रोमांटिक गीत नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस गाने की प्रेरणा कैलाश को अपने पिता की मृत्यु से मिली, जिसने उन्हें गाने के माध्यम से इस गहरे रिश्ते को व्यक्त करने का मौका दिया। जानें इस गाने की अनोखी कहानी और कैलाश खेर के जीवन के महत्वपूर्ण पल।
 
कैलाश खेर का गाना 'आज मेरे पिया घर आवेंगे': मोहब्बत नहीं, बल्कि आत्मा का मिलन!

कैलाश खेर का अनोखा गाना




मुंबई, 1 जनवरी। सूफी और क्लासिकल संगीत में प्रेम और मोहब्बत के गाने तो बहुत हैं, लेकिन जब बात कैलाश खेर की आती है, तो उनके गाने की हर पंक्ति का एक अलग महत्व होता है। उनकी आवाज सीधे दिल को छू जाती है।


कैलाश खेर, जिन्होंने 700 से अधिक गानों में अपनी आवाज दी है, किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। 'अल्लाह के बंदे हंस दे' और 'रब्बा इश्क न होवे' जैसे गानों से उन्होंने लोकप्रियता हासिल की है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनका गाना 'आज मेरे पिया घर आवेंगे' एक रोमांटिक गाना नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक गीत है?


शादी-ब्याह में अक्सर बजने वाला यह गाना लोगों के बीच यह धारणा बनाता है कि दुल्हन अपने पिया के स्वागत की तैयारी कर रही है, लेकिन असल में यह गाना आत्मा और परमात्मा के मिलन को दर्शाता है। गाने की पहली पंक्ति 'हे री सखी मंगल गाओ री, धरती अंबर सजाओ री, आज उतरेगी पी की सवारी' का अर्थ है कि एक आत्मा, जो अपने शरीर को छोड़ चुकी है, अपने परमात्मा से मिलने के लिए उत्सुक है। आत्मा खुद को सजाकर अपने 'पी' से मिलने की तैयारी कर रही है।


कैलाश खेर ने बताया कि इस गाने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता की मृत्यु से मिली थी। उन्होंने कहा कि 21 नवंबर को उनके पिता जोर-जोर से भजन गा रहे थे, और अचानक उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। उनके चेहरे पर एक अद्भुत शांति थी, जैसे वे अपने भगवान से मिल चुके हों।


पिता की मृत्यु के बाद कैलाश खेर ने इस गाने के माध्यम से आत्मा और परमात्मा के रिश्ते को शब्दों में पिरोया। उन्होंने कहा कि यह गाना उनके लिए बहुत खास है, क्योंकि यह उन्हें अपने पिता की याद दिलाता है।


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