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अनुपम खेर की 'सारांश' ने 42 साल पूरे किए: संघर्ष की कहानी और सफलता के राज

अनुपम खेर ने अपनी पहली फिल्म 'सारांश' के 42 साल पूरे होने पर अपने संघर्ष और सफलता की यात्रा को साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने केवल 37 रुपए लेकर मुंबई में कदम रखा और मेहनत के बल पर 551 फिल्मों में काम किया। इस वीडियो में उन्होंने छोटे शहरों के युवाओं को प्रेरित करने का प्रयास किया है। जानें उनके जीवन के इस प्रेरणादायक सफर के बारे में।
 
अनुपम खेर की 'सारांश' ने 42 साल पूरे किए: संघर्ष की कहानी और सफलता के राज

अनुपम खेर का सफर: 42 साल पहले की यादें




मुंबई, 25 मई। अनुभवी अभिनेता अनुपम खेर ने अपने कठिन परिश्रम से एक अलग पहचान बनाई है। आज वह हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों में से एक माने जाते हैं, लेकिन उनका प्रारंभिक सफर आसान नहीं था। सोमवार को उनकी पहली फिल्म 'सारांश' के 42 साल पूरे होने पर, उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए एक वीडियो साझा किया।


फिल्म 'सारांश', जो 25 मई 1984 को रिलीज हुई थी, ने अनुपम खेर को फिल्म इंडस्ट्री में एक नई पहचान दिलाई। इस फिल्म में उन्होंने 65 वर्षीय बुजुर्ग का किरदार निभाया, जबकि उनकी उम्र उस समय केवल 28 वर्ष थी। इस खास मौके पर, उन्होंने अपने जीवन के सफर, संघर्ष और सफलता के बारे में दिल से बात करते हुए एक वीडियो पोस्ट किया।


अनुपम खेर ने अपने पोस्ट में कहा, ''मुझे नहीं समझ आता कि ये 42 साल इतनी तेजी से कैसे बीत गए। इन वर्षों में मुझे फिल्म इंडस्ट्री, दर्शकों, निर्देशकों, निर्माताओं, तकनीशियनों और अपने सहकर्मियों से इतना प्यार मिला, जिसकी मैंने कभी कल्पना नहीं की थी।''


उन्होंने विशेष रूप से छोटे शहरों से आने वाले युवाओं को प्रेरित करने का प्रयास किया। अनुपम खेर ने कहा, ''अगर एक फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में काम करने वाले क्लर्क का बेटा केवल 37 रुपए लेकर मुंबई आ सकता है और अपने पहले किरदार से लोगों के दिलों में जगह बना सकता है, तो कुछ भी असंभव नहीं है। जब मैंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा, तब मेरे पास न पैसा था और न कोई बड़ा सहारा, लेकिन मेहनत और विश्वास ने मुझे यहां तक पहुंचा दिया।''


वीडियो में उन्होंने कहा, ''आज 42 साल बाद मैं गर्व से कह सकता हूं कि मैंने 551 फिल्मों में काम किया है। अगर इंसान अपने सपनों पर विश्वास रखे और मेहनत करना न छोड़े, तो वह किसी भी मुकाम तक पहुंच सकता है।''


इस खास पोस्ट में महेश भट्ट और सूरज बड़जात्या का उल्लेख करते हुए अनुपम खेर ने उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, ''इन दोनों फिल्मकारों का मेरे जीवन और करियर में बहुत बड़ा योगदान रहा है। जब 'सारांश' रिलीज हुई थी, तब सूरज एक सहायक के रूप में काम कर रहे थे और आज वह मेरे साथ कई फिल्मों में काम कर चुके हैं।''


अनुपम खेर ने उस दिन की एक घटना भी साझा की जब 'सारांश' रिलीज हुई थी। उन्होंने बताया, ''उसी दिन मुंबई में दंगे भड़क गए थे। उस समय मुझे लगा था कि अब मेरा करियर शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाएगा, क्योंकि लोग फिल्म देखने सिनेमाघरों तक नहीं पहुंच पाएंगे। लेकिन समय ने कुछ और ही तय कर रखा था। आज भी जब लोग मेरे अभिनय की बात करते हैं तो सबसे पहले 'सारांश' का नाम जरूर लेते हैं।''


उन्होंने कहा, ''इतने सालों और इतनी फिल्मों के बाद भी लोग अक्सर कहते हैं- 'वैसी फिल्म फिर नहीं बनी जैसी 'सारांश' थी।' उस समय मैं बिल्कुल नया था और मैंने उस किरदार को निभाने के लिए अपना सबकुछ लगा दिया था।''


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