सुनील शेट्टी का एक्शन हीरो बनने का सफर: मेहनत और किस्मत का अनोखा मेल
सुनील शेट्टी की सफलता की कहानी
मुंबई, 9 अगस्त। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता सुनील शेट्टी ने 90 के दशक में एक्शन, रोमांस, कॉमेडी और गंभीर भूमिकाओं के जरिए अपनी एक अलग पहचान बनाई। आज भी उनकी एक्शन हीरो की छवि सबसे अधिक चर्चित है। एक पुराने इंटरव्यू में, सुनील ने कहा था कि किसी भी कलाकार की सफलता केवल किस्मत पर निर्भर नहीं होती। इसके लिए निरंतर मेहनत, सीखने की इच्छा और गलतियों को सुधारने का जज्बा आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इसमें 75 प्रतिशत मेहनत और 25 प्रतिशत किस्मत का योगदान होता है।
सुनील ने इंटरव्यू में कहा, ''मेहनत का प्रतिशत 75 है, जबकि किस्मत का 25। मैंने हमेशा मेहनत की है और सीखने की कोशिश की है। आलोचनाओं को खुले दिल से स्वीकार किया है और यह समझने की कोशिश की है कि सामने वाला क्या कहना चाहता है। अपनी कमियों को दूर करने और अपनी खूबियों पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास किया।''
उन्होंने आगे कहा, ''एक अभिनेता के रूप में, मैं मानता हूं कि हर कलाकार में कुछ कमजोरियां और कुछ ताकत होती हैं। इसलिए मैंने अपनी कमियों को सुधारने और अपनी ताकत को दर्शकों के सामने बेहतर तरीके से पेश करने पर ध्यान केंद्रित किया।''
एक्शन हीरो बनने के अपने अनुभव के बारे में सुनील ने बताया कि यह आसान नहीं था। इसके लिए उन्हें ऐसे स्टंट करने पड़े, जिनमें चोट लगने का खतरा था। कई बार उन्हें इतना दर्द सहना पड़ा कि उनके शरीर की हड्डियों पर भी असर पड़ा।
सुनील ने कहा, ''एक्शन इमेज बनाने के लिए मैंने ऐसे स्टंट किए, जिनसे मेरी जान जा सकती थी। मुझे चोटें आईं और मेरी हड्डियाँ टूट गईं। यह सब आसान नहीं था। उस समय की एक्शन फिल्मों में स्टंट करना बहुत कठिन था। मेरा उद्देश्य केवल स्टंट करना नहीं था, बल्कि एक ऐसा एक्शन हीरो बनाना था, जिसे देखकर दर्शक यकीन कर सकें कि वह किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है। मैं चाहता था कि लोग मेरे एक्शन को वास्तविक मानें।''
सुनील शेट्टी ने 1992 में 'बलवान' फिल्म से बॉलीवुड में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने 'मोहरा', 'बॉर्डर', 'धड़कन', 'हेरा फेरी', 'मैं हूं ना', 'फिर हेरा फेरी' और 'आवारा पागल दीवाना' जैसी कई सफल फिल्मों में काम किया।
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