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सिद्धांत गुप्ता ने साझा की जम्मू की यादें, बताया कैसे घर की सादगी से मिलती है ताकत

अभिनेता सिद्धांत गुप्ता ने अपने होमटाउन जम्मू में बिताए बचपन के पलों को याद करते हुए बताया कि कैसे यह सादगी और परिवार का साथ उन्हें पेशेवर जीवन में ताकत देता है। उन्होंने साझा किया कि कैसे अपने घर लौटने से उन्हें आत्म-समझने का अवसर मिलता है और यह उनके लिए ऊर्जा का स्रोत बनता है। सिद्धांत ने रिश्तों के महत्व और अपनेपन की भावना पर भी जोर दिया।
 
सिद्धांत गुप्ता ने साझा की जम्मू की यादें, बताया कैसे घर की सादगी से मिलती है ताकत

सिद्धांत गुप्ता की जड़ों से जुड़ी बातें


मुंबई, 16 अप्रैल। वर्तमान समय में लोग अपने करियर और सपनों की खोज में अपने मूल स्थानों से दूर होते जा रहे हैं। खासकर फिल्म और मनोरंजन उद्योग में काम करने वाले कलाकारों के लिए यह दूरी और भी अधिक महसूस होती है। इस संदर्भ में अभिनेता सिद्धांत गुप्ता ने अपने विचार साझा किए और अपने होमटाउन जम्मू में बिताए पलों को याद किया।


सिद्धांत ने कहा, ''जम्मू में मेरा बचपन साधारण लेकिन खुशियों से भरा था। उस समय सोशल मीडिया का अस्तित्व नहीं था, इसलिए मैं खेल-कूद और रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रहता था। मैं अपने भाई के साथ अखबार से रॉकेट बनाकर खेलता था। ये यादें मेरे दिल के करीब हैं, इनमें एक सादगी है जो आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में कहीं खो गई है।''


उन्होंने आगे कहा, "मैं साल में कम से कम दो बार जम्मू जाता हूं, खासकर दिवाली के समय। एक कलाकार के रूप में हर नए किरदार के साथ मेरी सोच और दृष्टिकोण बदलता है, लेकिन जब मैं अपने घर लौटता हूं, तो मुझे खुद को फिर से समझने का अवसर मिलता है। जम्मू मेरे लिए केवल एक स्थान नहीं, बल्कि मेरी पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।"


अपने अनुभव साझा करते हुए सिद्धांत ने कहा, ''जम्मू में बिताया समय मेरे लिए बहुत खास होता है। वहां परिवार के साथ बैठकर हंसना, पुरानी बातें करना, कभी-कभी विचारों में मतभेद होना, हल्की-फुल्की नोकझोंक और बिना किसी खास बात के बातचीत करना भी मुझे सुकून देता है। जब कहने के लिए कुछ नहीं होता, तब भी वहां का सन्नाटा मुझे अच्छा लगता है। यह सन्नाटा मेरे लिए खालीपन नहीं, बल्कि एक ऐसा एहसास है जो मुझे भीतर से मजबूत बनाता है।''


सिद्धांत ने अपने पेशेवर जीवन के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, ''इस इंडस्ट्री में लगातार काम करना और खुद को साबित करना आसान नहीं है। यह एक ऐसी दौड़ है, जिसमें कई बार इंसान अकेला महसूस करता है। ऐसे में अपने घर और परिवार के पास जाना मेरे लिए ऊर्जा का स्रोत है। यही कारण है कि मैं अपने व्यस्त शेड्यूल के बावजूद अपने होमटाउन जाने का समय निकालता हूं।''


उन्होंने अंत में कहा, ''समय तेजी से बीतता है और हमें इसका एहसास नहीं होता। इसलिए यह आवश्यक है कि हम अपने प्रियजनों के साथ समय बिताएं और अपने रिश्तों को मजबूत बनाए रखें। हर व्यक्ति अंदर से भावुक होता है और अपनेपन की यह भावना ही उसे आगे बढ़ने की शक्ति देती है। सिनेमा हमेशा रहेगा, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़ाव ही इंसान को असली मायनों में मजबूत बनाता है।''


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