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सायरा बानो ने अपनी गुरु रोशन कुमारी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी, जानें उनकी यादों के बारे में

प्रसिद्ध अभिनेत्री सायरा बानो ने हाल ही में अपनी गुरु, पद्मश्री सम्मानित कथक नृत्यांगना रोशन कुमारी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने इंस्टाग्राम पर पुरानी तस्वीरें साझा करते हुए रोशन कुमारी के साथ अपने रिश्ते और उनके द्वारा सिखाए गए नृत्य के महत्व के बारे में बताया। सायरा ने कहा कि रोशन कुमारी केवल एक शिक्षिका नहीं थीं, बल्कि परिवार का हिस्सा बन गई थीं। इस लेख में जानें सायरा के दिल को छू लेने वाले शब्द और उनके गुरु के प्रति सम्मान।
 

सायरा बानो की भावुक श्रद्धांजलि

मुंबई, 9 अक्टूबर। प्रसिद्ध अभिनेत्री सायरा बानो ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर अपनी गुरु, पद्मश्री सम्मानित कथक नृत्यांगना रोशन कुमारी को श्रद्धांजलि अर्पित की, जो 82 वर्ष की आयु में निधन हो गईं।


उन्होंने शुक्रवार को अपनी गुरु के साथ पुरानी श्वेत-श्याम तस्वीरें साझा कीं और एक भावुक संदेश लिखा। इस संदेश में सायरा ने न केवल अपनी गुरु के प्रति अपने प्रेम और सम्मान को व्यक्त किया, बल्कि यह भी बताया कि रोशन कुमारी उनके लिए केवल एक शिक्षिका नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा बन गई थीं।


सायरा ने कहा कि कुछ विदाई इतनी कठिन होती है कि शब्द भी कम पड़ जाते हैं। रोशन कुमारी ने उन्हें कथक सिखाने के साथ-साथ विश्वासपात्र, दोस्त और बड़ी बहन की तरह भी साथ दिया।


उन्होंने बताया कि रोशन कुमारी ने उन्हें सिखाया कि नृत्य केवल शारीरिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, समर्पण और आत्मा की अभिव्यक्ति का माध्यम है।


सायरा ने यह भी साझा किया कि रोशन कुमारी उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थीं और उनकी शादी में भी शामिल थीं। उन्होंने उन्हें जयपुर घराने की महान कलाकार बताया और कहा कि उनका कथक अद्वितीय था।


उन्होंने लिखा कि वह अपनी गुरु को अलविदा नहीं कहना चाहतीं, बल्कि 'फिर मिलेंगे' कहना चाहेंगी, क्योंकि कुछ रिश्ते मृत्यु से समाप्त नहीं होते।


सायरा ने अपने बचपन की यादों को साझा करते हुए कहा कि जब वह कथक सीखने गई थीं, तब उन्हें नहीं पता था कि वह एक ऐसी शख्सियत से मिल रही हैं जो उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डालेगी।


उन्होंने रोशन कुमारी के नृत्य की विशेषताओं का भी उल्लेख किया, जिसमें उनकी गरिमा और खूबसूरती शामिल थी।


सायरा ने सत्यजीत रे की फिल्म 'जलसाघर' में रोशन कुमारी के नृत्य का भी जिक्र किया, जिसे उन्होंने भारतीय सिनेमा के यादगार क्षणों में से एक बताया।


उन्होंने कहा, 'रोशन कुमारी को अपनी महानता साबित करने के लिए कुछ कहने की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि उनकी कला ही उनकी पहचान थी। मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे उनसे कथक सीखने का अवसर मिला।'


उन्होंने अंत में कहा, 'मैं आपको अलविदा नहीं कहना चाहती, बल्कि यही कहना चाहूंगी कि फिर मिलेंगे, क्योंकि कुछ रिश्ते हमेशा यादों में जीवित रहते हैं।'


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