सतीश कौशिक की फिल्म 'रूप की रानी चोरों का राजा' की असफलता ने किया था उन्हें तोड़, जानें क्या हुआ था!
सतीश कौशिक की फिल्म का दर्दनाक अनुभव
मुंबई, 26 अप्रैल। फिल्म उद्योग में कई बार कलाकार और निर्माता अपनी फिल्मों को सफल बनाने के लिए वर्षों की मेहनत और बड़ी रकम खर्च करते हैं। लेकिन जब वही फिल्म दर्शकों की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरती, तो इसका प्रभाव केवल करियर पर नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता और निर्देशक सतीश कौशिक के साथ भी ऐसा ही एक अनुभव हुआ था, जिसने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।
यह कहानी सतीश कौशिक की फिल्म 'रूप की रानी चोरों का राजा' से जुड़ी है, जो अपने समय की सबसे महंगी हिंदी फिल्मों में से एक मानी जाती थी। इस फिल्म में अनिल कपूर और श्रीदेवी ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई थीं। बड़े सितारों और भारी बजट के बावजूद, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल रही। सतीश कौशिक ने इसका निर्देशन किया था, जबकि इसे बोनी कपूर ने प्रोड्यूस किया था।
एक सेलिब्रिटी चैट शो 'जीना इसी का नाम है' में सतीश कौशिक ने साझा किया कि फिल्म के फ्लॉप होने के बाद वह इतने परेशान हो गए थे कि उन्हें बोनी कपूर से यह पूछने की हिम्मत नहीं हो रही थी कि फिल्म का प्रदर्शन कैसा चल रहा है।
इस बातचीत में बोनी कपूर ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि फिल्म की असफलता ने सतीश कौशिक को पूरी तरह से तोड़ दिया था। वह इतने निराश हो गए थे कि आत्महत्या के विचार तक उनके मन में आए।
बोनी कपूर ने कहा, ''सतीश चलती कार से कूदने के लिए भी तैयार थे। होटल पहुंचने के बाद वह पहली मंजिल से कूदने की बात कर रहे थे।''
हालांकि, इस गंभीर स्थिति को सतीश कौशिक ने मजाक में बताया कि जब वह होटल की पहली मंजिल पर खड़े थे, तब नीचे खाने का इंतजाम किया गया था। ऐसे में उन्हें ख्याल आया कि अगर वह नीचे कूद गए और खाने पर गिर पड़े, तो लोग समझेंगे कि वह खाने के लिए कूदे हैं, न कि आत्महत्या के लिए।
फिल्म 'रूप की रानी चोरों का राजा' की कहानी मशहूर लेखक जावेद अख्तर ने लिखी थी। इसमें अनुपम खेर, जॉनी लीवर और जैकी श्रॉफ जैसे बड़े कलाकार भी शामिल थे। यह फिल्म 16 अप्रैल 1993 को रिलीज हुई थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी।
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