संदीपा धर की नई भूमिकाएं: कॉमेडी से इमोशन तक का सफर
संदीपा धर के दो नए प्रोजेक्ट्स
नई दिल्ली, 24 फरवरी। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक कलाकार की पहचान उसके द्वारा चुने गए प्रोजेक्ट्स से बनती है। जब कोई कलाकार विभिन्न शैलियों में खुद को आजमाता है, तो उसका सफर और भी रोमांचक हो जाता है। इस समय, एक्ट्रेस संदीपा धर अपने दो भिन्न प्रोजेक्ट्स के लिए चर्चा में हैं।
एक तरफ, वह आगामी शो 'चुंबक' में हल्की-फुल्की पारिवारिक कॉमेडी का हिस्सा हैं, जबकि दूसरी ओर, फिल्म 'दो दीवाने शहर में' में उनका किरदार नैना दर्शकों को भावनात्मक रूप से छू रहा है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे इन दोनों प्रोजेक्ट्स ने उन्हें एक कलाकार के रूप में नई चुनौतियों का सामना करने का मौका दिया।
संदीपा 'चुंबक' को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि यह एक पारिवारिक कॉमेडी है, जिसे हर उम्र के दर्शक एक साथ बैठकर देख सकते हैं। उन्होंने कहा, "आजकल के समय में कंटेंट अक्सर बोल्ड होता है, लेकिन 'चुंबक' रिश्तों की गर्माहट को फिर से जीवित करने की कोशिश करता है। इसमें भद्दी कॉमेडी या असहज करने वाले जोक्स नहीं हैं। कहानी पड़ोसियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां लोग बेझिझक एक-दूसरे के घर आते-जाते हैं और साथ में खाना खाते हैं, जिससे रिश्तों में अपनापन बढ़ता है।"
संदीपा का मानना है कि आज के समय में यह पड़ोस कल्चर लगभग खत्म हो चुका है और 'चुंबक' उसी खोए हुए अपनापन को वापस लाने का प्रयास कर रहा है।
कॉमेडी का अनुभव उनके लिए नया है। उन्होंने कहा, "कॉमेडी जितनी आसान लगती है, उतनी होती नहीं है। टाइमिंग, रिएक्शन और सिचुएशनल ह्यूमर को समझना आसान नहीं है। इसमें रिद्म और सटीकता बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन अनुभवी कलाकारों के साथ काम करने से बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। सेट पर हल्का-फुल्का माहौल और टीम का सहयोग इस जॉनर को समझने में मेरी मदद कर रहा है।"
इसके विपरीत, 'दो दीवाने शहर में' का अनुभव उनके लिए भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण रहा। हाल ही में रिलीज हुई इस फिल्म में उन्होंने नैना नाम की लड़की का किरदार निभाया। हालांकि उनकी स्क्रीन टाइमिंग कम थी, लेकिन उन्होंने कहानी में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी।
संदीपा ने कहा, "इस फिल्म का हिस्सा बनना मेरे लिए बेहद खास अनुभव रहा। फिल्म में मेरे सीन कम थे, लेकिन नैना का किरदार गहराई वाला था। सीमित सीन में किसी किरदार की पूरी मानसिक स्थिति को दिखाना किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। नैना बाहर से एकदम परफेक्ट दिखती है, लेकिन अंदर से वह अकेली और उलझी हुई है। इस दोहरेपन को पर्दे पर लाना मेरे लिए परीक्षा की तरह था।"
उन्होंने आगे कहा, "फिल्म में ब्रेकडाउन सीन मेरे लिए सबसे चुनौतीपूर्ण रहा, क्योंकि इसमें केवल मैं ही थी और पूरा भावनात्मक बोझ मुझ पर था। मैं ग्लिसरीन का इस्तेमाल नहीं करती, इसलिए हर टेक में असली इमोशन्स लाना शारीरिक और मानसिक रूप से थका देने वाला था। गर्मी में मुंबई की पीक समर के दौरान शूटिंग करना भी मुश्किलें बढ़ाता है, लेकिन जब पूरी टीम का साथ मिलता है, तो मुश्किलें भी यादगार बन जाती हैं।"
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