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संजय खान: कैसे बने 'गोल्डन बॉय ऑफ बॉलीवुड' और क्या है उनकी कहानी?

संजय खान, जो 60 और 70 के दशक में बॉलीवुड के प्रमुख सितारों में से एक थे, को 'गोल्डन बॉय ऑफ बॉलीवुड' का टैग मिला। उनके करियर की शुरुआत 'हकीकत' से हुई, लेकिन 'दोस्ती' ने उन्हें पहचान दिलाई। संजय ने कई हिट फिल्मों में काम किया और बाद में टीवी पर भी सफलता पाई। जानें उनके जीवन की कहानी और कैसे उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में कदम रखा।
 
संजय खान: कैसे बने 'गोल्डन बॉय ऑफ बॉलीवुड' और क्या है उनकी कहानी?

संजय खान का सुनहरा दौर




मुंबई, 2 जनवरी। बॉलीवुड के अभिनेता संजय खान को 60 और 70 के दशक में उन चुनिंदा सितारों में गिना जाता था जिनकी फिल्में लगातार हिट होती थीं। उनकी आकर्षक कद-काठी, गहरी आवाज और गंभीर अभिनय ने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में एक विशेष पहचान दिलाई। इसी समय के दौरान उन्हें प्यार से 'गोल्डन बॉय ऑफ बॉलीवुड' का नाम दिया गया, जो उनकी फिल्मों की सफलता और स्टारडम का परिणाम था।


संजय खान का जन्म 3 जनवरी 1940 को बेंगलुरु में हुआ। उनका असली नाम शाह अब्बास अली खान था। बचपन से ही उन्हें फिल्मों में रुचि थी। कहा जाता है कि राज कपूर की फिल्म 'आवारा' देखने के बाद उन्होंने तय किया कि उन्हें भी फिल्मों में काम करना है। यह निर्णय उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।


उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1964 में चेतन आनंद की फिल्म 'हकीकत' से की। भले ही इस फिल्म में उनका रोल छोटा था, लेकिन उसी वर्ष आई फिल्म 'दोस्ती' ने उन्हें पहचान दिलाई। 'दोस्ती' न केवल सुपरहिट रही, बल्कि इसने नेशनल अवॉर्ड भी जीता। इसके बाद संजय खान का करियर तेजी से आगे बढ़ा।


60 और 70 के दशक में संजय खान ने कई हिट फिल्मों में काम किया, जैसे 'दस लाख', 'एक फूल दो माली', 'इंतकाम', 'उपासना', 'धुंध', 'मेला' और 'नागिन'। इन फिल्मों में उनकी अदाकारी को काफी सराहा गया। दर्शकों को उनकी सादगी और गंभीरता बहुत पसंद आई, जिसके कारण मीडिया और फैंस ने उन्हें 'गोल्डन बॉय ऑफ बॉलीवुड' का नाम दिया।


संजय खान ने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन और निर्माण में भी कदम रखा। 1977 में उन्होंने फिल्म 'चांदी सोना' से निर्देशन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने 'अब्दुल्ला' जैसी फिल्म बनाई, जिसमें उन्होंने खुद भी अभिनय किया। हालांकि, समय के साथ उनका फिल्मी करियर कम होता गया और वे टीवी पर सक्रिय हो गए।


टेलीविजन में संजय खान ने एक नई पहचान बनाई। 90 के दशक में आया धारावाहिक 'द स्वोर्ड ऑफ टीपू सुल्तान' उस समय का सबसे भव्य शो माना गया। इसके बाद उन्होंने 'जय हनुमान' और '1857 क्रांति' जैसे ऐतिहासिक धारावाहिक बनाए, जिन्होंने उन्हें एक सफल टीवी निर्माता और निर्देशक के रूप में स्थापित किया।


अपने करियर में संजय खान को कई पुरस्कार और सम्मान मिले। उन्हें विभिन्न संस्थाओं द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट और एक्सीलेंस अवॉर्ड से नवाजा गया। फिल्मों और टीवी के अलावा, उन्होंने बिजनेस में भी कदम रखा और होटल व रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में काम किया।


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