शम्मी की पुण्यतिथि पर जैकी श्रॉफ ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, जानें उनकी अनोखी कहानी
शम्मी की याद में श्रद्धांजलि
मुंबई, 6 मार्च। हिंदी सिनेमा की दिग्गज अदाकारा शम्मी की पुण्यतिथि पर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर शम्मी की एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'आप हमेशा हमारी यादों में जीवित रहेंगी।'
जैकी की इस पोस्ट ने प्रशंसकों को भावुक कर दिया। कई लोगों ने कमेंट करते हुए कहा कि शम्मी जी की मुस्कान और उनकी अदाकारी आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है।
शम्मी ने लगभग छह दशकों तक मनोरंजन उद्योग में सक्रिय रहकर दर्शकों का दिल जीता। उनका असली नाम नरगिस रबादी था, लेकिन वे 'शम्मी आंटी' के नाम से प्रसिद्ध हुईं। उन्होंने फिल्मों में आंटी, नानी और परिवार की बुजुर्ग महिला जैसे कई किरदार निभाए, जिससे वे हर घर में पहचानी जाने लगीं।
उनके नाम 'शम्मी' रखने के पीछे एक दिलचस्प किस्सा है। कहा जाता है कि जब नरगिस रबादी अपने करियर की शुरुआत कर रही थीं, तब उन्हें अपनी पहली फिल्म 'उस्ताद पेड्रो' मिली। फिल्म के निर्माता शेख मुख्तार ने उन्हें नाम बदलने की सलाह दी, क्योंकि उस समय नरगिस दत्त का नाम बहुत बड़ा था। इसी कारण नरगिस ने अपना नाम बदलकर 'शम्मी' रख लिया।
शम्मी ने फिल्मों के अलावा टेलीविजन पर भी काम किया, जहां उन्होंने कई कॉमेडी शो में अपनी छाप छोड़ी। उनके प्रसिद्ध शो में 'देख भाई देख', 'जबान संभाल के', 'श्रीमान श्रीमती', 'कभी ये कभी वो', और 'फिल्मी चक्कर' शामिल हैं।
वे फैशन डिजाइनर मणि रबादी की बहन थीं और फिल्म निर्माता सुल्तान अहमद के साथ उनकी शादी सात साल में टूट गई। शम्मी, अभिनेत्री नरगिस दत्त की करीबी मित्र थीं। उन्होंने 'मल्हार' (1951), 'इल्जाम' (1954), 'हलाकू' (1956), 'दिल अपना और प्रीत पराई' (1960), 'हाफ टिकट' (1962), 'कुली नंबर 1' (1991), 'गोपी किशन' (1994), 'हम साथ-साथ हैं' (1999), और 'शिरीन फरहाद की तो निकल पड़ी' (2013) जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया।
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