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शक्ति कपूर की फिल्म 'जख्मी इंसान': हीरो बनने का सपना और उसका बुरा अंत

शक्ति कपूर, जो बॉलीवुड में खलनायक और कॉमेडी भूमिकाओं के लिए जाने जाते हैं, ने एक समय हीरो बनने का सपना देखा था। उनकी फिल्म 'जख्मी इंसान' ने केवल 15 मिनट में ही थिएटर छोड़ दिया, जिससे उन्हें अपनी खलनायक भूमिकाओं को फिर से मांगने के लिए मजबूर होना पड़ा। जानें इस दिलचस्प कहानी के बारे में और कैसे उन्होंने अपने करियर में सफलता पाई।
 
शक्ति कपूर की फिल्म 'जख्मी इंसान': हीरो बनने का सपना और उसका बुरा अंत

बॉलीवुड में शक्ति कपूर की पहचान

शक्ति कपूर की फिल्म 'जख्मी इंसान': बॉलीवुड में खलनायक और हास्य भूमिकाओं के लिए मशहूर शक्ति कपूर आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब उन्होंने हीरो बनने का सपना देखा था? उन्होंने विलेन की भूमिकाओं को छोड़कर हीरो बनने का प्रयास किया और एक फिल्म में मुख्य भूमिका भी निभाई, लेकिन वह फिल्म केवल 15 मिनट में ही सिनेमाघरों से हटा दी गई।


हीरो बनने की ख्वाहिश

एक साक्षात्कार में शक्ति कपूर ने बताया कि उनके पास हीरो जैसा चेहरा है और वह लीड रोल निभाने की क्षमता रखते हैं। इसी प्रेरणा से उन्होंने 1982 में 'जख्मी इंसान' में मुख्य भूमिका निभाने का निर्णय लिया। हालांकि, इसके बाद वह कभी भी हीरो के रूप में नहीं दिखे।


फिल्म का बुरा हाल

शक्ति कपूर की 'जख्मी इंसान' ने न केवल उन्हें बल्कि फिल्म के निर्माता, निर्देशक और दर्शकों को भी निराश किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फिल्म को महज 15 मिनट में ही स्क्रीन से हटा दिया गया था।


वापसी की कहानी

इस असफलता के बाद शक्ति कपूर ने हीरो बनने का सपना छोड़ दिया, लेकिन उन्हें उन विलेन की भूमिकाओं को फिर से मांगने के लिए निर्माताओं के पास जाना पड़ा, जिन्हें उन्होंने पहले ठुकरा दिया था।


एक सफल करियर की शुरुआत

हालांकि 'जख्मी इंसान' ने उनके हीरो बनने के सपने को तोड़ दिया, लेकिन इसके बाद शक्ति कपूर ने खलनायक और कॉमेडी में जो सफलता हासिल की, वह आज भी बरकरार है। उन्होंने 700 से अधिक फिल्मों में काम किया और 'क्राइम मास्टर गोगो' जैसे यादगार किरदार निभाए। आज वह उस असफल फिल्म को एक सीख और मजेदार किस्से के रूप में याद करते हैं।


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