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शक्ति कपूर का अनोखा किस्सा: कैसे एक दुकानदार ने किया था उनके स्टार बनने का अनुमान?

शक्ति कपूर ने एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है जिसमें एक दुकानदार ने उनकी अभिनेता बनने की भविष्यवाणी की थी। इस घटना ने शक्ति कपूर को प्रेरित किया और जब उन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू किया, तो वह उस दुकानदार से मिलने पहुंचे। जानें इस प्रेरणादायक कहानी के बारे में और शक्ति कपूर के करियर के बारे में।
 

शक्ति कपूर का प्रेरणादायक अनुभव

मुंबई, 25 अक्टूबर। अभिनेता शक्ति कपूर ने एक बार एक दिलचस्प घटना साझा की, जिसमें एक दुकानदार ने उनके अभिनेता बनने की भविष्यवाणी की थी।


कॉमेडियन कपिल शर्मा के शो में बातचीत के दौरान, शक्ति कपूर ने बताया कि उनके पड़ोस में एक दुकानदार था, जिसने उनके स्टार बनने से पहले ही अपनी दुकान पर उनका बड़ा पोस्टर लगा रखा था।


इस घटना को याद करते हुए, शक्ति कपूर ने कहा, "उसने मेरी एक बड़ी तस्वीर लगा रखी थी। रात में जब हम 3-4 दोस्त उस पान की दुकान पर मिलते थे, तो वह मुझसे कहता था, 'तुम यहां क्या कर रहे हो? मुंबई जाकर कुछ कोशिश करो, तुम सफल हो जाओगे। देखो मैंने तो तुम्हारा पोस्टर भी लगा दिया है।'"


शक्ति कपूर ने कहा कि वह दुकानदार का यह प्यार और विश्वास कभी नहीं भूलेंगे। जब उन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू किया और पहचान मिलने लगी, तो वह उस दुकानदार से मिलने पहुंचे।


उन्होंने बताया कि तब तक दुकानदार की दुकान भी पहले से बड़ी हो चुकी थी। शक्ति कपूर ने उससे कहा, "तुमने जो कहा था, वह सच हो गया। भगवान तुम्हारा भला करे। तुम्हें कभी किसी चीज की जरूरत हो और मैं अपनी क्षमता के अनुसार तुम्हारी मदद करूंगा।"


शक्ति कपूर ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1977 में आई फिल्म "खेल खिलाड़ी का" से की थी, जिसका निर्देशन अर्जुन हिंगोरानी ने किया था। इस फिल्म में उन्होंने टोनी का किरदार निभाया था।


चार दशकों से अधिक लंबे करियर में, शक्ति कपूर ने 700 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है।


बॉलीवुड के सबसे बहुमुखी कलाकारों में से एक, शक्ति कपूर ने कॉमेडी और खलनायक दोनों तरह की भूमिकाओं में अपनी अलग पहचान बनाई है।


उन्हें विशेष रूप से 1994 की कल्ट फिल्म "अंदाज अपना अपना" में निभाए गए क्राइम मास्टर गोगो के किरदार के लिए याद किया जाता है। उनका प्रसिद्ध डायलॉग, "आंखें निकाल के गोटियां खेलूंगा", आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है।


उनकी चर्चित फिल्मों में "कुर्बानी" (1980), "हीरो" (1983), "हिम्मतवाला" (1983), "राजा बाबू" (1994), "अंदाज अपना अपना" (1994), "कूली नंबर 1" (1995) और "जुड़वा" (1997) शामिल हैं।


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