शंकर-जयकिशन: बॉलीवुड के संगीत के बादशाहों की अनकही कहानी
शंकर सिंह रघुवंशी और जयकिशन की अनोखी दोस्ती
मुंबई, 25 अप्रैल। पहलवानी के प्रति जुनून और अनुशासन के प्रतीक शंकर सिंह रघुवंशी की मुलाकात बंबई के पृथ्वी थियेटर में गुजरात के युवा हारमोनियम वादक जयकिशन से हुई। शंकर ने उसकी प्रतिभा को पहचाना और उसे काम दिलाने में मदद की।
किस्मत का सितारा तब चमका जब राज कपूर अपनी फिल्म 'बरसात' (1949) के लिए संगीतकार की तलाश में थे। शंकर ने एक धुन प्रस्तुत की, जो राज कपूर को भा गई। राज कपूर ने शंकर को फिल्म का संगीतकार नियुक्त किया, लेकिन शंकर ने एक शर्त रखी: "मेरे दोस्त जयकिशन को भी संगीतकार बनाना होगा।" राज कपूर ने सहमति दी, और इस तरह एक ऐसी जोड़ी का जन्म हुआ जिसने अगले 22 वर्षों तक बॉलीवुड पर राज किया।
उन्होंने फिल्म संगीत के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया। 'आवारा', 'श्री 420', 'चोरी-चोरी' और 'संगम' जैसी फिल्मों ने उन्हें इतनी सफलता दिलाई कि शंकर-जयकिशन को एक फिल्म के लिए 5 लाख रुपए मिलने लगे, जो कई बार हीरो की फीस से भी अधिक थे।
कहा जाता है कि 1960 के दशक के मध्य में, जब जयकिशन ने एक पत्रिका में यह दावा किया कि 'संगम' का प्रसिद्ध गीत 'ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर' केवल उनकी रचना है, तो शंकर का दिल टूट गया। उन्होंने कभी किसी को नहीं बताया था कि कौन सी धुन किसने बनाई थी।
जयकिशन का निधन 12 सितंबर 1971 को हुआ। इससे पहले, शंकर ने अपने करीबी दोस्त और गीतकार शैलेन्द्र को भी खो दिया था।
जयकिशन की मृत्यु के बाद, जिन लोगों ने शंकर-जयकिशन के नाम पर फिल्में बनाई थीं, उन्होंने कहना शुरू कर दिया कि धुनें केवल जयकिशन की थीं। सबसे बड़ा झटका उन्हें राज कपूर से मिला, जिन्होंने अपनी अगली फिल्म 'बॉबी' के लिए शंकर को छोड़कर लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को साइन कर लिया। लेकिन 1975 में, शंकर ने मनोज कुमार की फिल्म 'संन्यासी' में अकेले इतना शानदार संगीत दिया कि पूरा देश "चल संन्यासी मंदिर में" पर झूम उठा।
1980 के दशक में सिंथेसाइज़र और डिस्को का युग आया, और बड़े निर्माताओं ने शंकर से मुंह मोड़ लिया। इस दौरान, उनके पुराने साथी सुधाकर शर्मा ने अपनी फिल्म 'गोरी' के लिए 21,000 रुपए लेकर शंकर के पास आए। शंकर ने मुस्कुराते हुए कहा, "जो लड़का कभी मुझे स्टूडियो में कॉफी पिलाता था, आज मुझे काम दे रहा है।" उन्होंने वह पैसे लौटा दिए और महज 1 रुपए के शगुन पर धुन बनाई।
शंकर सिंह रघुवंशी का जन्म 15 अक्टूबर, 1922 को हैदराबाद में हुआ। उन्होंने हमेशा शराब से दूरी बनाए रखी और नियमित व्यायाम किया। 26 अप्रैल, 1987 को अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।
--News Media
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