विनोद खन्ना: एक ऐसे अभिनेता जिनकी अदाकारी ने दिलों को जीता
विनोद खन्ना का जीवन और करियर
मुंबई, 26 अप्रैल। विनोद खन्ना का नाम सुनते ही दर्शकों के मन में एक खास जगह बन जाती है। वह एक ऐसे अभिनेता थे, जिनकी खलनायकी भी दर्शकों को भाती थी और असल जिंदगी में वह बेहद आकर्षक और फिटनेस के प्रति जागरूक थे।
कम ही लोग जानते हैं कि विनोद खन्ना न केवल अभिनय में, बल्कि खेलों में भी काफी कुशल थे। उनका जन्म 6 अक्टूबर 1946 को पेशावर (अब पाकिस्तान) में हुआ था, और विभाजन के बाद उनका परिवार मुंबई आ गया। उन्होंने अपनी शिक्षा दिल्ली और मुंबई में प्राप्त की और सिडनहम कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की।
विनोद खन्ना को बचपन से ही खेलों का शौक था। वह टेनिस, फुटबॉल और क्रिकेट के दीवाने थे और युवा अवस्था में कुश्ती भी सीखी। उनकी आकर्षक व्यक्तित्व और मजबूत काया ने उन्हें जल्दी ही पहचान दिलाई। स्कूल के दिनों में उन्होंने कई नाटकों में भाग लिया, जिससे उन्हें मंच पर आने का मौका मिला।
फिल्म इंडस्ट्री में विनोद खन्ना को पहला अवसर सुनील दत्त ने दिया, जिन्होंने उन्हें अपनी फिल्म 'मन का मीत' में खलनायक की भूमिका दी। इस फिल्म में लीना चंदावरकर नायिका थीं और विनोद खन्ना ने सोम दत्त के खिलाफ खलनायक का किरदार निभाया। उनकी मेहनत और अभिनय ने उन्हें जल्दी ही लोकप्रियता दिलाई।
उनका फिल्मी सफर विविधतापूर्ण रहा। उन्होंने 'मीरा', 'इम्तिहान', 'इंकार' और 'लेकिन' जैसी भावना प्रधान फिल्मों में बेहतरीन अभिनय किया। इसके साथ ही, 'कच्चे धागे', 'अमर अकबर एंथनी', 'खून पसीना', 'हेरा फेरी', 'मेरा गांव मेरा देश' और 'आखिरी डाकू' जैसी एक्शन फिल्मों में भी उनका दबदबा रहा।
1971 में गुलजार की फिल्म 'मेरे अपने' में उन्हें नायक के रूप में चुना गया, जिससे उनके संजीदा अभिनय की शुरुआत हुई। गुलजार ने उन्हें 'मीरा' और 'इम्तिहान' जैसी फिल्मों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं दीं। 'लेकिन' में उनकी भूमिका आज भी याद की जाती है। अमिताभ बच्चन के साथ उनकी टक्कर हमेशा बराबरी की रही। 1974 में 'हाथ की सफाई' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
हालांकि, 1978 में अपने करियर के चरम पर रहते हुए विनोद खन्ना ने अंदर से एक खालीपन महसूस किया और अध्यात्म की ओर मुड़ गए। वह कई सालों तक फिल्म इंडस्ट्री से दूर रहे, लेकिन 1985 में उन्होंने जोरदार वापसी की। मुकुल आनंद की 'मिली इंसाफ' और राज सिप्पी की 'सत्यमेव जयते' जैसी फिल्मों से उन्होंने फिर से अपनी जगह बनाई। फिरोज खान की फिल्म 'दयावान' में डॉन का किरदार निभाकर उन्होंने दर्शकों का दिल जीत लिया।
विनोद खन्ना ने अपने करियर में हर तरह की भूमिकाएं निभाईं और हर चुनौती को स्वीकार किया। 1999 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उन्होंने 'वांटेड' और 'दबंग' जैसी फिल्मों में सलमान खान के पिता का किरदार भी निभाया, जो दर्शकों को याद है।
उनके दो बेटे, अक्षय खन्ना और राहुल खन्ना, भी अभिनेता हैं। अक्षय खन्ना को विनोद खन्ना ने अपनी फिल्म 'हिमालय पुत्र' से लॉन्च किया था। 27 अप्रैल 2017 को गंभीर बीमारी के कारण विनोद खन्ना का निधन हो गया।
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