रीता भादुड़ी: बॉलीवुड की वो अदाकारा जो हर किरदार में बसी रहीं
रीता भादुड़ी का अद्वितीय सफर
नई दिल्ली, 16 जुलाई। बॉलीवुड में कुछ ऐसे चेहरे होते हैं जो भले ही सुर्खियों से दूर रहें, लेकिन जब वे पर्दे पर आते हैं, तो पूरी कहानी में जान डाल देते हैं। रीता भादुड़ी भी ऐसे ही कलाकारों में से एक थीं। उन्होंने फिल्मों में हीरोइन बनने का सपना देखा, लेकिन वह उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाईं। फिर भी, उन्होंने अपने अंतिम क्षणों तक काम किया और अपने हर छोटे-बड़े किरदार से एक विशेष पहचान बनाई। आज भी उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।
रीता भादुड़ी का जन्म 4 नवंबर 1955 को हुआ। उन्हें अभिनय का माहौल अपने परिवार से ही मिला, क्योंकि उनकी मां भी फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा थीं। बचपन से ही रीता को कैमरे और अभिनय की दुनिया का आकर्षण था। इस जुनून को पूरा करने के लिए उन्होंने पुणे के प्रतिष्ठित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से अभिनय की शिक्षा ली।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1968 में फिल्म 'तेरी तलाश में' से की। इसके बाद 1974 में फिल्म 'आइना' में उन्हें राजेश खन्ना और मुमताज जैसे बड़े सितारों के साथ काम करने का अवसर मिला। हालांकि उनका रोल छोटा था, लेकिन उनकी स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों का ध्यान खींचा।
1975 में आई सुपरहिट फिल्म 'जूली' उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने मुख्य किरदार की दोस्त का रोल निभाया और उस पर फिल्माया गया गीत 'ये रातें नई पुरानी' भी काफी लोकप्रिय हुआ। इसके बाद उन्होंने 'सावन को आने दो', 'अनुरोध', 'बेटा', 'हम आपके हैं कौन', 'राजा', 'क्या कहना', 'कभी हां कभी ना' और 'दिल विल प्यार व्यार' जैसी कई फिल्मों में दमदार सहायक भूमिकाएं निभाईं।
रीता भादुड़ी की खासियत यह थी कि वह जिस भी किरदार को निभाती थीं, उसमें पूरी तरह समाहित हो जाती थीं। चाहे वह मां का रोल हो, बहन का या किसी परिवार की समझदार महिला का, वह हर किरदार को इतना सहज बना देती थीं कि दर्शकों को वह अपने घर की सदस्य जैसी लगती थीं।
बहुत कम लोग जानते हैं कि हिंदी फिल्मों के अलावा रीता भादुड़ी ने गुजराती सिनेमा में भी शानदार काम किया। 1976 में आई फिल्म 'लाखो फुलानी' की सफलता के बाद वह लगभग आठ साल तक गुजराती फिल्मों की लोकप्रिय हीरोइन रहीं। वहां उन्होंने बतौर लीड एक्ट्रेस कई हिट फिल्में दीं और अपनी अलग पहचान बनाई।
90 के दशक में जब टीवी का दौर शुरू हुआ, तो रीता ने छोटे पर्दे पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी', 'साराभाई वर्सेस साराभाई', 'कुमकुम', 'अमानत', 'ससुराल गेंदा फूल' और 'निमकी मुखिया' जैसे धारावाहिकों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया। खासतौर पर 'निमकी मुखिया' में दादी का किरदार उनके आखिरी यादगार रोल्स में शामिल है।
रीता भादुड़ी ने अपने करियर में लगभग 70 फिल्मों और 20 से अधिक टीवी धारावाहिकों में काम किया। फिल्म 'राजा' में उनके शानदार अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर के सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था।
जहां उनका करियर सफल रहा, वहीं निजी जीवन में उन्होंने अकेले रहने का निर्णय लिया। उन्होंने कभी शादी नहीं की। जीवन के अंतिम वर्षों में वह डायबिटीज और किडनी की गंभीर बीमारी से जूझती रहीं। इलाज के लिए उन्हें मुंबई के अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन 17 जुलाई 2018 को 62 वर्ष की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
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