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राजस्थान हाईकोर्ट ने विद्याधर का बाग में शादी और पार्टियों पर लगाया प्रतिबंध!

राजस्थान उच्च न्यायालय ने जयपुर के विद्याधर का बाग में शादी समारोह और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि तेज संगीत और आतिशबाजी से संरक्षित वन्यजीवों को परेशानी होती है। सुनवाई के दौरान, वन विभाग से यह पूछा गया कि इस क्षेत्र में रेस्टोरेंट संचालन की अनुमति किस आधार पर दी गई। अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होगी, जिसमें संबंधित अधिकारी को अदालत में उपस्थित होकर जवाब देना होगा।
 

कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

राजस्थान उच्च न्यायालय ने जयपुर के प्रसिद्ध विद्याधर का बाग में विवाह समारोह, पार्टियों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश दिया है। न्यायालय ने यह निर्णय लिया है कि देर रात तक चलने वाले तेज संगीत, लेजर लाइट और आतिशबाजी से वहां के संरक्षित वन्यजीवों को परेशानी होती है। इस मामले में मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने सिटिजन्स प्रोटेक्शन सोसायटी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।


वन विभाग से सवाल


सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने वन विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा कि विद्याधर का बाग, जो एक संरक्षित वन क्षेत्र है, में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन के लिए टेंडर किस आधार पर जारी किया गया। न्यायालय ने रेस्टोरेंट संचालन की अनुमति से संबंधित प्रक्रिया और आधार पर भी सवाल उठाए हैं।


वन्यजीवों की सुरक्षा पर जोर

उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वन्यजीवों के संरक्षण वाले क्षेत्रों में ऐसी गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, जो वहां रहने वाले जीवों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। जनहित याचिका में उठाए गए सवालों के जवाब में, कोर्ट ने तेज संगीत, लेजर लाइट और आतिशबाजी के प्रभाव पर चिंता व्यक्त की। इसी कारण, कोर्ट ने विद्याधर का बाग में सभी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगा दी है।


अब वन विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में रेस्टोरेंट संचालन की अनुमति किन नियमों और प्रावधानों के तहत दी गई थी। इस मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होगी, जिसमें संबंधित अधिकारी को अदालत में उपस्थित होकर जवाब देना होगा।


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