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राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, चेक बाउंस मामले में मीडिएशन का आदेश

अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस के सात मामलों में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने दोनों पक्षों को मीडिएशन सेंटर भेजने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान, यादव के वकील ने बताया कि उन्हें कनाडा जाने की आवश्यकता है, जिससे उन्हें आर्थिक मदद मिल सकती है। इस मामले की जड़ 2010 में लिए गए कर्ज से जुड़ी है, जब यादव ने अपनी फिल्म 'अता पता लापता' के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से पैसे उधार लिए थे। जानें इस मामले की पूरी जानकारी।
 

सुप्रीम कोर्ट से राहत

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर। अभिनेता राजपाल यादव, जो चेक बाउंस के सात मामलों में सजा का सामना कर रहे हैं, को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। गुरुवार को उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान, उनके वकील ने अदालत को सूचित किया कि 13 अक्टूबर को बाकी 85 लाख रुपये भी सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कर दिए गए हैं। इस मामले को सुलझाने के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को मीडिएशन सेंटर भेजने का निर्देश दिया।


कनाडा यात्रा की उम्मीद

सुनवाई के दौरान, राजपाल यादव के वकील ने बताया कि अभिनेता को एक कार्यक्रम के लिए कनाडा जाना है। वहां से उन्हें कुछ वित्तीय सहायता मिलने की संभावना है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को उनका पासपोर्ट रिलीज करने का आदेश दिया।


मामले का समाधान

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि दोनों पक्ष आपस में बैठकर इस मामले का समाधान क्यों नहीं कर लेते। अदालत ने विवाद को बातचीत के माध्यम से सुलझाने के लिए मीडिएशन सेंटर भेजने का निर्देश दिया। अब दोनों पक्ष मध्यस्थता के जरिए मामले का समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।


कर्ज का विवाद

इस मामले की जड़ मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े सात चेक बाउंस मामलों में है। 2010 में, राजपाल यादव ने अपनी फिल्म 'अता पता लापता' के लिए कंपनी से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म 2012 में रिलीज हुई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही। इसके बाद कर्ज लौटाने को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।


चेक बाउंस का मामला

कंपनी का आरोप है कि कर्ज लौटाने के लिए दिए गए चेक बैंक में जमा करने पर बाउंस हो गए। इसके बाद, कंपनी ने राजपाल यादव के खिलाफ सात अलग-अलग मामले दर्ज कराए।


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