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रणदीप हुड्डा की अनसुनी कहानी: तीन साल घर पर रहकर भी मिले 35 हजार हर महीने!

रणदीप हुड्डा, जो हिंदी सिनेमा में अपने अनोखे अंदाज के लिए जाने जाते हैं, ने तीन साल तक घर पर रहकर हर महीने 35 हजार रुपए प्राप्त किए। इस दौरान उन्होंने अपने संघर्ष और अभिनय की चाह को बनाए रखा। जानें उनके जीवन की अनसुनी कहानी, जिसमें उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में टैक्सी चलाने से लेकर 'स्वतंत्र वीर सावरकर' जैसी फिल्मों में अभिनय और निर्देशन तक का सफर तय किया।
 

रणदीप हुड्डा का सफर




मुंबई, 19 अगस्त। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में रणदीप हुड्डा को उनके अनोखे अंदाज और बेहतरीन अभिनय के लिए जाना जाता है। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उन्हें फिल्मों में आने के बाद काम का इंतजार करना पड़ा। इस दिलचस्प अनुभव को रणदीप ने एक इंटरव्यू में साझा किया।


उन्होंने बताया कि राम गोपाल वर्मा ने उन्हें अपनी फिल्म में लॉन्च करने का आश्वासन दिया था, जिसके चलते वह लगभग तीन साल तक घर पर बैठे रहे। इस दौरान उन्हें हर महीने 35 हजार रुपए की सहायता भी मिलती रही।


रणदीप का जन्म 20 अगस्त 1976 को हरियाणा के रोहतक में हुआ। उनके पिता डॉक्टर थे और मां समाज सेवा में सक्रिय थीं। उनका अधिकांश बचपन दादी के साथ बीता, क्योंकि उनके माता-पिता काम के सिलसिले में विदेश में रहते थे। बचपन से ही उन्हें फिल्मों और अभिनय में रुचि थी। स्कूल में जब अंग्रेजी फिल्में दिखाई जाती थीं, तो वह खुद को फिल्म के नायक के रूप में कल्पना करते थे। हालांकि, परिवार चाहता था कि वह पढ़ाई पर ध्यान दें और एक सुरक्षित करियर चुनें।


रणदीप ने अपनी पढ़ाई के लिए ऑस्ट्रेलिया का रुख किया, जहां उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ विभिन्न काम भी किए। उन्होंने वहां टैक्सी चलाने का अनुभव भी लिया। एक बार उनकी टैक्सी में महान क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स भी सवार हुए। इस दौरान उनके मन में अभिनय की चाह बनी रही। अंततः वह भारत लौटे और फिल्मों में अपनी किस्मत आजमाने लगे।


उन्हें 2001 में मीरा नायर की फिल्म 'मानसून वेडिंग' में काम करने का अवसर मिला, जो उनके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ था। हालांकि, इसके बाद उनका करियर तुरंत नहीं बढ़ा। रणदीप ने बताया कि एक समय उन्हें लगा कि उन्हें अभिनय ठीक से नहीं आता। इसके बाद उन्होंने थिएटर का सहारा लिया और नसीरुद्दीन शाह के साथ काम करके अपने अभिनय कौशल को निखारा।


इस दौरान रणदीप के करियर में एक अनोखा मोड़ आया। उन्होंने बताया कि राम गोपाल वर्मा ने उन्हें अपनी फिल्म में लॉन्च करने का वादा किया था। जब रणदीप से पूछा गया कि उन्हें हर महीने कितने पैसे चाहिए, तो उन्होंने 35 हजार रुपए की मांग की। इसके बाद उन्हें तीन साल तक हर महीने यह राशि मिलती रही, जबकि वह घर पर ही बैठे रहे। लेकिन वह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ा जैसा उन्होंने सोचा था।


धीरे-धीरे उन्हें बेहतरीन भूमिकाएं मिलने लगीं। 'डी', 'रिस्क', 'वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई', 'साहेब बीवी और गैंगस्टर' और 'जन्नत 2' जैसी फिल्मों ने उनकी पहचान को मजबूत किया। 2014 में आई 'हाईवे' में महाबीर भाटी का किरदार निभाकर उन्होंने गंभीरता से सराहना प्राप्त की।


रणदीप ने 2016 में 'सरबजीत' में सरबजीत सिंह का किरदार निभाया, जिसके लिए उन्होंने बड़ा बदलाव किया और उनकी अदाकारी की काफी चर्चा हुई। इसके बाद उन्होंने हॉलीवुड फिल्म 'एक्सट्रैक्शन' में क्रिस हेम्सवर्थ के साथ भी काम किया।


रणदीप ने निर्देशन में भी कदम रखा। फिल्म 'स्वतंत्र वीर सावरकर' में उन्होंने न केवल मुख्य भूमिका निभाई, बल्कि निर्देशन भी किया, जिससे उन्होंने एक नए निर्देशक के रूप में पहचान बनाई।


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