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रणदीप हुड्डा: अपनी जड़ों से जुड़े रहने का महत्व और सच्ची कहानियों की तलाश

रणदीप हुड्डा, बॉलीवुड के एक प्रमुख अभिनेता, अपनी जड़ों और संस्कृति के प्रति अपने लगाव को साझा करते हैं। उन्होंने बताया कि कैसे सच्ची कहानियां और सांस्कृतिक मूल्य सिनेमा में महत्वपूर्ण हैं। उनका मानना है कि ऐसी कहानियां दर्शकों को गहराई से प्रभावित करती हैं। जानें उनके विचार और फिल्म उद्योग में गुणवत्ता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के बारे में।
 
रणदीप हुड्डा: अपनी जड़ों से जुड़े रहने का महत्व और सच्ची कहानियों की तलाश

रणदीप हुड्डा की संस्कृति और पहचान पर जोर


मुंबई, 9 जनवरी। बॉलीवुड के अभिनेता रणदीप हुड्डा हमेशा अपनी जड़ों से जुड़े रहने और अपनी संस्कृति को अपनाने पर जोर देते हैं। वह उन कलाकारों में से हैं जो ग्लैमर की बजाय कंटेंट को प्राथमिकता देते हैं। उनका मानना है कि भाषा, संस्कृति और जड़ें किसी व्यक्ति के लिए बाधा नहीं, बल्कि उसकी ताकत और पहचान होती हैं।


एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जब हम अपने मूल्यों और संस्कृति को समझते हैं और उन्हें अपनाते हैं, तो हमारी सोच और दुनिया को देखने का नजरिया बदल जाता है।


रणदीप अब उन कहानियों से जुड़ रहे हैं जो हरियाणवी, राजस्थानी और भोजपुरी संस्कृति को उजागर करती हैं।


उन्होंने कहा, ''मुझे ऐसी कहानियां पसंद हैं जो दिखावटी न हों, बल्कि जीवन की सच्चाई को ईमानदारी से पेश करें। आज के तेज और चमकदार दौर में, सिनेमा का काम लोगों को ठहरकर सोचने का अवसर देना भी है। गांव, मिट्टी, रिश्ते और संघर्ष से निकली कहानियां दर्शकों के दिल में अधिक समय तक रहती हैं। ऐसी फिल्मों में काम करना एक अभिनेता को और बेहतर बनाता है, क्योंकि यहां संवेदनशीलता भी आवश्यक होती है।''


रणदीप ने आगे कहा, ''मैं अपने करियर में संख्या से ज्यादा गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूं। हर फिल्म मेरे लिए एक सीख होती है, जो न केवल एक कलाकार, बल्कि एक इंसान के रूप में भी मुझे आगे बढ़ाती है। जब मैं अपनी जड़ों से जुड़ी कहानियों का हिस्सा बनता हूं, तो दर्शक भी खुद को उस कहानी में देख पाते हैं।''


बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, ''सिनेमा समाज को आईना दिखाने का कार्य करता है। यदि फिल्में लोगों को अपनी पहचान, संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने में सफल होती हैं, तो यही सिनेमा की असली जीत है। यही सोच मुझे बार-बार ऐसी कहानियों की ओर खींचती है, जो सरल होते हुए भी गहरी छाप छोड़ जाती हैं।''


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