Movie prime

महान शायर साहिर लुधियानवी की जयंती पर मोहम्मद रफी की भावुकता की कहानी

हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के साथ-साथ हिंदी सिनेमा के महान शायर साहिर लुधियानवी की जयंती भी मनाई जाती है। इस अवसर पर जानें कैसे मोहम्मद रफी ने साहिर के एक गाने को गाते समय भावुक होकर रो पड़े। उनकी शायरी और गीतों की गहराई आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है। इस लेख में साहिर की लेखनी और रफी की भावनाओं का अनोखा किस्सा प्रस्तुत किया गया है।
 
महान शायर साहिर लुधियानवी की जयंती पर मोहम्मद रफी की भावुकता की कहानी

साहिर लुधियानवी की जयंती और मोहम्मद रफी की भावनाएं





हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है, जो महिलाओं की उपलब्धियों और संघर्षों को मान्यता देता है। इसी दिन हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध शायर और गीतकार साहिर लुधियानवी की जयंती भी होती है। साहिर ने अपनी लेखनी से समाज के दर्द, प्रेम, विद्रोह और मानवीय भावनाओं को अमर किया। उनकी शायरी और गीत आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।


साहिर लुधियानवी, जिनका असली नाम अब्दुल हई था, का जन्म 8 मार्च 1921 को लुधियाना, पंजाब में हुआ। संगीतकार रवि ने एक इंटरव्यू में बताया कि 1968 में रिलीज हुई फिल्म 'नील कमल' के गाने "बाबुल की दुआएं लेती जा" के बोल इतने भावुक थे कि गायक मोहम्मद रफी की आंखों में आंसू आ गए। रिहर्सल के दौरान रफी की भावनाओं को देखकर रवि घबरा गए और जब उन्होंने रफी से पूछा, तो उन्होंने बताया कि उनकी बेटी की हाल ही में सगाई हुई थी, जिससे वह गाने की भावनाओं से जुड़ गए।


इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान रफी की आवाज में स्पष्ट रूप से थरथराहट और भावुकता सुनाई देती है। इतना ही नहीं, उन्होंने इस गाने को रिकॉर्ड करने के लिए शादी के समारोह को छोड़ दिया और इसके लिए कोई पारिश्रमिक भी नहीं लिया। यह गाना नेशनल अवॉर्ड भी जीत चुका है और आज भी हर शादी में विदाई के पल में गाया जाता है।


साहिर की लेखनी बहुआयामी थी। उन्होंने भजन, कव्वाली, रोमांटिक और व्यंग्यात्मक गीत लिखे। 'नील कमल' में एक और मजेदार गाना "खाली डब्बा, खाली बोतल" था, जिसे मन्ना डे ने गाया था। इस गाने के बोल जीवन के खोखलेपन पर गहरा व्यंग्य करते हैं। साहिर ने ऐसे गीत दिए जो साहित्य की ऊंचाइयों तक पहुंचे।


उनकी शायरी में सामाजिक एकता का संदेश भी था, जैसे कि "तू हिंदू बनेगा न मुसलमान बनेगा, इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा"। संगीतकार रवि ने बताया कि साहिर कभी-कभी मूडी होते थे, लेकिन जब वह लौटते थे, तो हमेशा बेहतरीन गीत लेकर आते थे।


--आईएएनएस


एमटी/डीकेपी



OTT