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मनहर उधास: कैसे एक छोटे बच्चे ने बॉलीवुड के महान गायक का सफर तय किया?

मनहर उधास की कहानी एक छोटे बच्चे की है, जिसने संगीत के प्रति अपने जुनून के चलते बॉलीवुड में एक अद्वितीय पहचान बनाई। सौराष्ट्र के एक छोटे से गांव से निकलकर, उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक इंजीनियर के रूप में की, लेकिन जल्द ही उनकी आवाज ने उन्हें बॉलीवुड का प्रमुख गायक बना दिया। जानें कैसे उन्होंने अपने करियर में कई हिट गाने दिए और गुजराती गजलों के पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज भी, 83 वर्ष की उम्र में, वे लाइव कॉन्सर्ट्स कर रहे हैं।
 
मनहर उधास: कैसे एक छोटे बच्चे ने बॉलीवुड के महान गायक का सफर तय किया?

मनहर उधास का अनोखा सफर




मुंबई, 12 मई। यह कहानी 1950 के दशक की है, जब सौराष्ट्र के सावरकुंडला में एक सात वर्षीय बच्चा स्कूल जाने के लिए नदी पार करता था। उसके रास्ते में एक रेडियो से केएल सहगल की गहरी आवाज सुनाई देती थी। उस आवाज का जादू उसे इस कदर प्रभावित करता था कि उसने अपने पिता से उस गाने का रिकॉर्ड खरीदने की जिद की, भले ही उनके घर में ग्रामोफोन नहीं था। वह रोज़ पड़ोसी के घर जाकर घंटों तक केएल सहगल के गाने सुनता।


यह जुनून आगे चलकर भारतीय संगीत में एक अद्वितीय आवाज, मनहर उधास, को जन्म देने वाला था।


मनहर उधास का जन्म 13 मई 1943 को बड़ौदा राज्य (अब गुजरात) में हुआ। उनके परिवार में कला और शिक्षा का अनूठा संगम था। उनके पिता, केशुभाई उधास, एक सरकारी अधिकारी और 'इसराज' (दिलरुबा) के कुशल वादक थे, जबकि उनकी मां, जीतूबेन, एक प्रतिभाशाली गायिका थीं।


हालांकि, उस समय संगीत को करियर बनाना आसान नहीं था। इसलिए, मनहर ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। 1965 में जब वे अपने सपनों के शहर मुंबई पहुंचे, तो उनकी जिंदगी दो हिस्सों में बंट गई। दिन में वे एक टेक्सटाइल कंपनी में इंजीनियर के रूप में काम करते थे, और शाम को 'फेमस स्टूडियोज' में एक अघोषित 'स्क्रैच' सिंगर बन जाते थे।


1969 में, फिल्म 'विश्वास' के एक गाने की रिकॉर्डिंग होनी थी। महान गायक मुकेश उस दिन उपलब्ध नहीं थे, इसलिए संगीत निर्देशकों ने मनहर से डमी ट्रैक गवाया। लेकिन जब मुकेश ने मनहर की रिकॉर्डिंग सुनी, तो वे हैरान रह गए। गाना मनहर के नाम से रिलीज हुआ और रातों-रात हिट हो गया।


1970 से 90 के दशक के बीच, मनहर उधास की आवाज बॉलीवुड में सबसे पसंदीदा बन गई। सुभाष घई और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ उनका सहयोग ऐतिहासिक रहा। जब सुभाष घई ने 'हीरो' में जैकी श्रॉफ को लॉन्च किया, तो मनहर की आवाज ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया।


इसके बाद, हिट गानों की एक श्रृंखला आई। 'राम लखन', 'सौदागर', 'कुर्बानी', और 'त्रिदेव' जैसे गाने मनहर की बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाते हैं।


अपने करियर के चरम पर, मनहर ने बॉलीवुड से दूरी बना ली और गुजराती गजलों के पुनर्जागरण में जुट गए। उन्होंने अपने गजलों को उच्च-स्तरीय प्रोडक्शन वैल्यू दी। 1975 में उनका एल्बम 'सूरज ढलती सांज' और 1986 में टी-सीरीज के साथ 'आगमन' ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।


83 वर्ष की आयु में भी, मनहर उधास आज भी राजकोट से टेक्सास तक लाइव कॉन्सर्ट्स कर रहे हैं।


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