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भोजपुरी सिनेमा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की चाहत: देवी की खास बातें

भोजपुरी, मैथिली, मगही और हिंदी की प्रसिद्ध लोकगायिका देवी ने भोजपुरी सिनेमा की गुणवत्ता और रवि किशन की भाषा को बढ़ावा देने की योजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने भोजपुरी सिनेमा के स्तर को ऊंचा उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया और बिहार के प्रतिभाशाली कलाकारों से फिल्म निर्माण में योगदान देने की अपील की। देवी ने रियलिटी शो के मार्केटिंग और टीआरपी के खेल पर भी अपनी राय व्यक्त की। जानें उनके विचार और भोजपुरी सिनेमा के भविष्य के बारे में।
 

भोजपुरी गायिका देवी का साक्षात्कार

पटना, 26 अक्टूबर। भोजपुरी, मैथिली, मगही और हिंदी की मशहूर लोकगायिका देवी ने भोजपुरी सिनेमा की बढ़ती लोकप्रियता, अभिनेता और राजनेता रवि किशन की भाषा को बढ़ावा देने की योजनाओं, और फिल्म निर्माण में बिहार सरकार के सहयोग पर चर्चा की।


गायिका ने बातचीत की शुरुआत में 'छठी मैया' गाकर सभी को छठ पूजा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने रवि किशन की भाषा को बढ़ावा देने की योजनाओं पर कहा, "रवि किशन जी एक उत्कृष्ट कलाकार हैं। हालांकि, कभी-कभी उनकी फिल्मों में गिरावट देखने को मिलती है, लेकिन अगर उन्हें लगता है कि वह भोजपुरी के लिए कुछ सकारात्मक करना चाहते हैं, तो यह सराहनीय है। उन्होंने बॉलीवुड में भी काम किया है और मुझे लगता है कि वह भोजपुरी सिनेमा के लिए एक अच्छे अभिनेता हैं।"


यह भी उल्लेखनीय है कि रवि किशन ने लोकसभा में एक निजी सदस्य विधेयक (संविधान संशोधन विधेयक, 2024) पेश किया है, जिसका उद्देश्य भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना और इसे आधिकारिक राजभाषा का दर्जा दिलाना है।


देवी ने भोजपुरी सिनेमा के स्तर को लेकर भी अपनी राय व्यक्त की। उनका मानना है कि भोजपुरी सिनेमा की गुणवत्ता को बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "मैं चाहती हूं कि भोजपुरी इंडस्ट्री के निर्देशक बेहतरीन फिल्में बनाएं, ताकि हमें और भी उत्कृष्ट फिल्में देखने को मिलें। पहले के समय में अच्छी फिल्में बनती थीं, लेकिन अब उनका स्तर काफी गिर गया है। मैं चाहती हूं कि बिहार के प्रतिभाशाली कलाकार आगे आकर फिल्म निर्माण में योगदान दें, ताकि इसका स्तर ऊंचा हो सके।"


उन्होंने आगे कहा, "रियलिटी शो में आजकल मार्केटिंग और टीआरपी का खेल देखने को मिलता है। जिस तरह से शो की लोकप्रियता बढ़ती है, उसे उसी तरह से डिजाइन किया जाता है, क्योंकि इन शोज में कोई संस्कृति या कला देखने को नहीं मिलती। बस कुछ मजेदार प्रतियोगी आते हैं और दर्शक मजे लेते हैं। मेकर्स का मुख्य उद्देश्य होता है कि उनका शो सफल हो।"


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