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बीआर इशारा: चाय परोसने से लेकर फिल्म निर्देशन तक की प्रेरणादायक यात्रा

बीआर इशारा की कहानी एक प्रेरणादायक यात्रा है, जो चाय परोसने से लेकर हिंदी सिनेमा के एक प्रमुख निर्देशक बनने तक फैली हुई है। उन्होंने अपने करियर में कई विवादास्पद फिल्में बनाई, जिनमें 'चेतना' शामिल है, जो एक सेक्स वर्कर की कहानी पर आधारित थी। इशारा ने नए कलाकारों को अवसर देने में विश्वास किया और कई प्रसिद्ध अभिनेताओं को शुरुआती पहचान दिलाई। उनके जीवन के अंतिम वर्षों में फिल्म निर्माण से दूरी बनाना और 2012 में उनका निधन, उनकी यात्रा को एक गहरी छाप छोड़ता है। इस लेख में उनके संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानें।
 

बीआर इशारा की अनोखी कहानी




मुंबई, 24 जुलाई। हिंदी सिनेमा में बीआर इशारा ने उस समय फिल्में बनाई जब समाज कई मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने से कतराता था। उनकी फिल्मों ने कई बार विवादों को जन्म दिया, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने विचारों के अनुसार काम किया। बहुत से लोग नहीं जानते कि बीआर इशारा ने फिल्म उद्योग में कदम रखने से पहले सेट पर चाय परोसने का काम किया। उनका यह संघर्ष ही उनकी सफलता की नींव बना।


बीआर इशारा का जन्म 7 सितंबर 1934 को हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में हुआ। उनका असली नाम रोशन लाल शर्मा था। बचपन से ही कुछ अलग करने की चाह ने उन्हें मुंबई की ओर खींच लिया।


अपने शुरुआती दिनों में उन्होंने छोटे-मोटे काम करके जीवन यापन किया। कहा जाता है कि मुंबई आने के बाद उन्हें 'बाबू' उपनाम मिला। बाद में उन्होंने अपने नाम में 'राम' जोड़ा और लेखक बनने पर 'इशारा' तखल्लुस अपनाया। इस प्रकार वह हमेशा के लिए 'बाबू राम इशारा' के नाम से जाने गए।


मुंबई में उनका सफर आसान नहीं था। उन्होंने फिल्मों के सेट पर पहले 'टी-बॉय' के रूप में काम किया, जहां उन्होंने कलाकारों और तकनीशियनों को चाय परोसी। इसके बाद उन्हें 'स्पॉट बॉय' का काम मिला, जिसमें उन्हें सेट की जिम्मेदारियों का ध्यान रखना था। इसी दौरान उन्होंने फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को नजदीक से देखा और धीरे-धीरे कहानी लिखने में रुचि विकसित की। कुछ समय बाद उन्होंने लेखकों की मदद करना शुरू किया और फिर खुद कहानियां लिखने लगे। यही अनुभव उन्हें निर्देशन की दुनिया में ले गया।


बीआर इशारा ने 1964 में फिल्म 'आवारा बादल' से निर्देशन की शुरुआत की, लेकिन उन्हें असली पहचान 1970 में आई फिल्म 'चेतना' से मिली। यह फिल्म एक सेक्स वर्कर की कहानी पर आधारित थी, जो उस समय एक बड़ा जोखिम माना जाता था। फिल्म की कहानी अपने समय से काफी आगे थी, जिससे यह चर्चा का विषय बनी। इसी फिल्म से अभिनेत्री रेहाना सुल्तान को भी पहचान मिली। बाद में 1984 में बीआर इशारा ने रेहाना सुल्तान से विवाह किया।


उन्होंने हमेशा नए कलाकारों पर भरोसा किया। फिल्म 'चरित्र' के जरिए भारतीय क्रिकेटर सलीम दुर्रानी को फिल्मों में मौका दिया। इसी फिल्म से अभिनेत्री परवीन बाबी और संगीतकार बप्पी लाहिड़ी को भी पहचान मिली। उन्होंने अमिताभ बच्चन, जया भादुरी, शत्रुघ्न सिन्हा, रीना रॉय, डैनी डेन्जोंगपा, विजय अरोड़ा, राज किरण और रजा मुराद जैसे कई कलाकारों को शुरुआती अवसर दिए।


1964 से 1996 के बीच बीआर इशारा ने लगभग 35 फिल्मों का निर्देशन किया। उनके करियर की प्रमुख फिल्मों में 'मिलाप', 'मन जाइए', 'एक नजर', 'जरूरत', 'लोग क्या कहेंगे', 'घर की लाज', 'वो फिर आएगी' और 'सौतेला भाई' शामिल हैं। उनकी फिल्म 'वो फिर आएगी' सिल्वर जुबली हिट रही, जबकि 'सौतेला भाई' को समीक्षकों ने सराहा। हालांकि, उनकी कई फिल्मों को उस समय बी-ग्रेड कहकर आलोचना का सामना करना पड़ा, लेकिन बाद में फिल्म विशेषज्ञों ने माना कि उनकी सोच अपने समय से काफी आगे थी।


जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने फिल्में बनाना लगभग बंद कर दिया। लंबे समय तक बीमारी से जूझने के बाद 24 जुलाई 2012 को मुंबई के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया। उनकी उम्र 77 वर्ष थी।


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