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बिक्रमजीत कंवरपाल: एक सैनिक से अभिनेता बनने की प्रेरणादायक कहानी

बिक्रमजीत कंवरपाल की कहानी एक प्रेरणादायक यात्रा है, जो एक सैनिक से अभिनेता बने। हिमाचल प्रदेश में जन्मे बिक्रमजीत ने भारतीय सेना में सेवा की और फिर बॉलीवुड में कदम रखा। उनकी फिल्मों में सशक्त किरदारों ने उन्हें एक अद्वितीय पहचान दिलाई। जानें उनके जीवन के संघर्ष, उपलब्धियों और अंतिम दिनों के बारे में।
 
बिक्रमजीत कंवरपाल: एक सैनिक से अभिनेता बनने की प्रेरणादायक कहानी

एक अद्वितीय जीवन यात्रा


मुंबई, 30 अप्रैल। अभिनेता बिक्रमजीत कंवरपाल केवल एक कलाकार नहीं थे, बल्कि उनके अंदर शौर्य की एक अद्भुत विरासत समाई हुई थी। 29 अगस्त 1968 को हिमाचल प्रदेश के सोलन में जन्मे बिक्रमजीत के पिता, मेजर द्वारका नाथ कंवरपाल, भारतीय सेना के एक प्रतिष्ठित अधिकारी और 'कीर्ति चक्र' के विजेता थे। आर्मी बैकग्राउंड में बड़े होने के कारण, बिक्रमजीत के लिए अनुशासन एक जीवनशैली बन गया।


उन्होंने देश के प्रसिद्ध लॉरेंस स्कूल, सनावर में पढ़ाई की, जहां उनके अंदर अभिनय का जुनून जागृत हुआ। उनके दोस्त उन्हें प्यार से 'बिज' या 'बिजू' कहते थे। स्कूल के नाटकों में उनकी प्रतिभा चमकती थी, लेकिन जब करियर का चुनाव करने का समय आया, तो उन्होंने अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए 1989 में भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया।


फौज में मेजर कंवरपाल का जीवन किसी रॉकस्टार से कम नहीं था। उनके बैचलर रूम में दोस्तों की महफिलें सजती थीं। वे शानदार अंग्रेजी बोलते थे और हमेशा खुशमिजाज रहते थे। रस्साकशी से लेकर क्लब की पार्टियों तक, वे हर जगह लीडर बने रहते थे।


हालांकि, उनका जीवन केवल पार्टियों तक सीमित नहीं था। उन्होंने सियाचिन ग्लेशियर जैसे खतरनाक युद्धक्षेत्र में भी अपनी सेवाएं दीं। वहां की ठंड और खतरनाक परिस्थितियों ने उन्हें एक मजबूत आत्मविश्वास दिया, जिसने बाद में मुंबई में संघर्षों का सामना करने में मदद की। 13 वर्षों की सेवा के बाद, 34 साल की उम्र में उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा।


उनकी पहली मुलाकात 2002 में पूजा भट्ट से हुई, जिसके बाद उन्हें फिल्म 'पाप' (2003) में काम करने का अवसर मिला। इसके बाद, उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2000 के दशक में, जब बॉलीवुड को यथार्थवादी किरदारों की आवश्यकता थी, मेजर कंवरपाल निर्देशकों की पहली पसंद बन गए।


फिल्मों में उनके किरदार जैसे 'कॉर्पोरेट' में सीनियर वीपी, 'डॉन' में डॉ. अशोक खिलवानी, और 'मर्डर 2' में कमिश्नर अहमद खान ने उन्हें एक सशक्त अभिनेता के रूप में स्थापित किया। उनका लहजा और शारीरिक मुद्रा इतनी वास्तविक थी कि उन्हें अभिनय करने की आवश्यकता नहीं पड़ती थी।


टेलीविजन और ओटीटी प्लेटफार्मों पर भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। '24' में एजेंट प्रधान, 'अदालत' में वकील रंधावा और 'स्पेशल ऑप्स' जैसी वेब सीरीज ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया।


पर्दे पर सख्त दिखने वाले 'बिजू' असल जिंदगी में एक कोमल और जिंदादिल इंसान थे। सेट पर वे अनुशासन में रहते थे, लेकिन पैकअप के बाद सबसे ज्यादा मस्ती करने वाले होते थे।


वे 'सॉफ्ट रॉक' संगीत के शौकीन थे और जब वे गिटार लेकर गाते थे, तो सभी मंत्रमुग्ध हो जाते थे। बेहतरीन डांसर होने के साथ-साथ, वे सेट पर सबके 'बड़े भाई' थे, जो अपने सैन्य दिनों के किस्से सुनाकर सबको प्रेरित करते थे।


2021 में, जब कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने देश को प्रभावित किया, बिक्रमजीत कंवरपाल भी इस वायरस का शिकार हो गए। सियाचिन की बर्फीली खाइयों में मौत को मात देने वाला यह सैनिक मुंबई के एक अस्पताल में वायरस से जंग हार गया। 1 मई 2021 की सुबह, उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली।


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