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बादशाह का 'टटीरी फिर से' गाना: महाभारत से जुड़ी अनसुनी कहानी

पंजाबी गायक बादशाह अपने विवादित गाने 'टटीरी फिर से' को नए बदलावों के साथ फिर से रिलीज करने जा रहे हैं। इस गाने का हरियाणा और महाभारत काल से गहरा संबंध है, जो भगवान श्रीकृष्ण की कृपा को दर्शाता है। जानें इस गाने के पीछे की अनसुनी कहानी और टटीरी के महत्व के बारे में।
 
बादशाह का 'टटीरी फिर से' गाना: महाभारत से जुड़ी अनसुनी कहानी

बादशाह का नया गाना 'टटीरी फिर से'




मुंबई, 14 अप्रैल। पंजाबी गायक बादशाह अपने नए गाने 'टटीरी फिर से' को लेकर चर्चा में हैं। इस गाने को पहले विवाद के चलते बैन कर दिया गया था, लेकिन अब इसे नए बदलावों के साथ फिर से रिलीज किया जा रहा है।


गाने के पहले संस्करण में कुछ लिरिक्स को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था, जिसके कारण इसे सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। इस विवाद पर चर्चा तो हुई, लेकिन क्या आप जानते हैं कि 'टटीरी' का हरियाणा और महाभारत काल से गहरा संबंध है, जो भगवान के प्रति विश्वास को और मजबूत करता है?


'टटीरी' एक छोटे आकार का पक्षी है, जो खुले में अंडे देने के लिए जाना जाता है। हरियाणा में इसे खुशी और शुभता का प्रतीक माना जाता है। महाभारत में भी इसका उल्लेख है, जो यह दर्शाता है कि विषम परिस्थितियों में भी भगवान अपने प्रियजनों के साथ रहते हैं।


महाभारत के अनुसार, युद्ध शुरू होने से पहले टटीरी ने युद्ध के मैदान में अंडे दिए थे। यह देखकर पांडव हैरान रह गए और अंडों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गए। अर्जुन ने प्रतिज्ञा की कि वह टटीरी के अंडों की रक्षा करेंगे और अपने धनुष को उनके पास रख दिया।


युद्ध के दौरान कई सैनिक, घोड़े और हाथी मारे गए, और कुरुक्षेत्र की भूमि खून से लाल हो गई। युद्ध समाप्त होने के बाद, अर्जुन को टटीरी के अंडों की याद आई और उन्होंने श्रीकृष्ण से पूछा कि उनकी क्या स्थिति होगी। श्रीकृष्ण ने उन्हें धनुष हटाने के लिए कहा, और सभी अंडे सुरक्षित पाए गए। यह देखकर टटीरी और अर्जुन दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी।


कहा जाता है कि भीषण युद्ध के दौरान श्रीकृष्ण ने टटीरी के अंडों की रक्षा की थी। यह घटना भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम और कृपा को दर्शाती है। हरियाणा में टटीरी लोकगीतों का भी महत्वपूर्ण स्थान है, जहां महिलाएं अपनी भावनाओं को व्यक्त करती हैं। टटीरी पर कई भावुक गाने भी बनाए गए हैं।


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