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बंगाली सितारों पर चुनावी हिंसा भड़काने का आरोप, कानूनी कार्रवाई की मांग

पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद भड़की हिंसा के मामले में बंगाली अभिनेता परमब्रत चटर्जी और स्वस्तिका मुखर्जी पर आरोप लगे हैं। एक पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट के चलते इन दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन कलाकारों के बयानों ने चुनाव के बाद हुई हिंसा को बढ़ावा दिया। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और इसके पीछे की सच्चाई।
 
बंगाली सितारों पर चुनावी हिंसा भड़काने का आरोप, कानूनी कार्रवाई की मांग

पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा का मामला

पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद उत्पन्न हुई हिंसा का मामला एक बार फिर ताजा हो गया है। प्रसिद्ध बंगाली अभिनेता परमब्रत चटर्जी और स्वस्तिका मुखर्जी को एक पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट के चलते कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कोलकाता के गरियाहाट पुलिस थाने में इन दोनों के खिलाफ दंगे और हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता जयदीप सेन ने पुलिस से इन सेलिब्रिटीज के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है। उनका आरोप है कि इन कलाकारों ने मई 2021 में चुनाव के बाद हुई हिंसा को अपने बयानों से बढ़ावा दिया।


शिकायत में कहा गया है कि 2 मई 2021 को चुनाव परिणामों की घोषणा के दिन, परमब्रत चटर्जी ने एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने लिखा था, "आज के दिन को विश्व 'रोगोरानी' (दुष्टों की) पिटाई दिवस घोषित किया जाए!"। स्वस्तिका मुखर्जी ने इस ट्वीट पर एक इमोजी के साथ प्रतिक्रिया दी थी।


शिकायतकर्ता का कहना है कि इन सार्वजनिक हस्तियों के बयान, उस समय जब BJP कार्यकर्ताओं पर हमलों की घटनाएं बढ़ रही थीं, हिंसा को बढ़ावा देने वाले प्रतीत होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पहले से ही भारतीय दंड संहिता की धारा 107 के तहत इन दोनों के खिलाफ शिकायत दर्ज की जा चुकी है।


शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्वीट के एक घंटे बाद, BJP कार्यकर्ता अभिजीत सरकार की हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा, शिकायत में यह आरोप लगाया गया है कि चुनाव परिणामों के बाद पश्चिम बंगाल में BJP कार्यकर्ताओं के खिलाफ संगठित हिंसा का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें हत्याएं, हमले और यौन हिंसा की घटनाएं शामिल थीं।


चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, ये चुनाव 27 मार्च से 29 अप्रैल के बीच आठ चरणों में हुए थे, जिसमें औसतन 82 प्रतिशत मतदान हुआ। मतदान के दौरान और उसके बाद भी हिंसा की घटनाएं बढ़ती रहीं।


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