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फिल्म 'इक्का': एक पुरानी थ्रिलर की नई कहानी

फिल्म 'इक्का' एक पुरानी थ्रिलर की नई कहानी है, जिसमें सनी देओल और अक्षय खन्ना जैसे सितारे हैं। यह फिल्म सस्पेंस और कानूनी ड्रामा के बीच की जंग को दर्शाती है। कहानी में कई मोड़ हैं, लेकिन स्क्रीनप्ले की कमी के कारण कई खुलासे पहले से ही अनुमानित होते हैं। क्या यह फिल्म दर्शकों को बांधने में सफल होती है? जानें पूरी समीक्षा में।
 

बॉलीवुड की मर्डर मिस्ट्री का नया अवतार

बॉलीवुड का एक समय था जब सस्पेंस और मर्डर मिस्ट्री पर आधारित फिल्में दर्शकों को बेहद पसंद आती थीं। अब्बास-मस्तान की थ्रिलर से लेकर 'गुप्त' और 'इत्तेफाक' जैसी फिल्मों ने दर्शकों को कातिल की पहचान जानने के लिए उत्सुक रखा। लेकिन अब सिनेमा में बदलाव आ चुका है, और दर्शक अब अधिक जटिल कानूनी ड्रामा और बेहतरीन क्राइम थ्रिलर देख चुके हैं। इस बदलाव के चलते सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा की 'इक्का' फिल्म कुछ हद तक पुरानी लगती है।


फिल्म का परिचय

फिल्म 'इक्का' में मुख्य भूमिकाओं में सनी देओल, अक्षय खन्ना, आकांक्षा रंजन कपूर और अन्य कलाकार हैं। इसे सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा ने निर्देशित किया है। फिल्म को 2.5/5 की रेटिंग मिली है।


कहानी का सार

कहानी की शुरुआत सस्पेंस से होती है, जब सोमा (आकांक्षा रंजन कपूर) को शौर्यमान (अक्षय खन्ना) के साथ एक रात बिताते हुए देखा जाता है। अचानक, उसे एक तेज रफ्तार कार से फेंक दिया जाता है। यह मामला जल्द ही रसूख, राजनीति और सत्ता के खेल में बदल जाता है।


फिल्म में सनी देओल का किरदार अर्जुन, एक प्रसिद्ध डिफेंस लॉयर है, जो अदालत में नैतिकता के साथ कदम रखते हैं। वह न्याय और कानून के बीच के अंतर को उजागर करते हैं।


किरदारों का संघर्ष

अर्जुन की निजी जिंदगी में भी उतार-चढ़ाव हैं, जब उसकी बेटी एक महत्वपूर्ण तैराकी ट्रायल के दौरान बीमार पड़ जाती है। अक्षय खन्ना का किरदार एक बिगड़ैल राजनेता का बेटा है, जो अपनी पत्नी को छोड़कर दूसरी महिलाओं के साथ पार्टी करता है। अर्जुन पहले इस केस को लेने से मना कर देते हैं, लेकिन बेटी की बीमारी उन्हें मजबूर कर देती है।


निर्देशन और स्क्रीनप्ले की कमी

फिल्म में कई मोड़ आते हैं, लेकिन स्क्रीनप्ले में कमी के कारण दर्शक पहले से ही कई खुलासों का अनुमान लगा लेते हैं। क्लाइमेक्स भी अनुमानित होता है। निर्देशक सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा ने कई विचारों को एक साथ लाने की कोशिश की है, लेकिन यह कहानी को बिखरा हुआ बनाता है।


फिल्म का शीर्षक 'इक्का' दर्शाता है कि इसमें एक मजबूत पत्ता है, लेकिन जब तक वह सामने आता है, दर्शक पहले ही कहानी का अनुमान लगा चुके होते हैं।


देखने का कारण

यदि आप सनी देओल के पुराने अंदाज और अक्षय खन्ना के विलेन वाले किरदार के प्रशंसक हैं, तो यह फिल्म एक बार देखने लायक है।


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