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फरहान अख्तर: कला और खेल के प्रति जुनून रखने वाले बॉलीवुड के सितारे

फरहान अख्तर, जो 9 जनवरी 1974 को मुंबई में जन्मे, एक बहुआयामी कलाकार हैं। वे न केवल एक सफल अभिनेता और निर्देशक हैं, बल्कि कला और खेल के प्रति उनके गहरे प्रेम ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। उनके माता-पिता ने उन्हें स्वतंत्रता और सवाल पूछने की प्रेरणा दी, जिससे उन्होंने अपने करियर में नई ऊंचाइयों को छुआ। फरहान ने 'दिल चाहता है' जैसी फिल्मों से निर्देशन में कदम रखा और 'रॉक ऑन!!' जैसी फिल्मों में अभिनय किया। उनके जीवन में खेलों का महत्वपूर्ण स्थान है, जो उन्हें तनाव से राहत देते हैं। जानें उनके जीवन और करियर के बारे में और भी दिलचस्प बातें।
 
फरहान अख्तर: कला और खेल के प्रति जुनून रखने वाले बॉलीवुड के सितारे

फरहान अख्तर का जीवन और करियर


मुंबई में 9 जनवरी 1974 को जन्मे फरहान अख्तर केवल एक अभिनेता और निर्देशक नहीं हैं, बल्कि वे कला और खेल के प्रति अपने गहरे प्रेम के लिए भी जाने जाते हैं। उनके माता-पिता, जावेद अख्तर और हनी ईरानी, ने उन्हें हमेशा स्वतंत्रता और सवाल पूछने की प्रेरणा दी। यही कारण है कि फरहान ने अपने जीवन में हर चीज को अपने तरीके से जीने का निर्णय लिया।


बचपन में, फरहान ने क्रिकेट और फुटबॉल जैसे खेलों में भाग लिया, जिन्हें वे अपने जीवन का दूसरा प्यार मानते हैं। उनके लिए खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि तनाव से राहत पाने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी है।


फरहान ने अपने करियर की शुरुआत सहायक निर्देशक के रूप में की, जहां उन्होंने 'लम्हे' (1991) और 'हिमालय पुत्र' (1997) जैसी फिल्मों में काम किया। इसके बाद, उन्होंने 'दिल चाहता है' (2001) से निर्देशन में कदम रखा, जिसने उन्हें युवाओं के बीच लोकप्रियता दिलाई और राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीता।


उनकी अन्य सफल निर्देशित फिल्मों में 'लक्ष्य' (2004) और 'डॉन' (2006) शामिल हैं, जो उनकी रचनात्मकता को दर्शाती हैं। फरहान ने अभिनय में भी कदम रखा और 'रॉक ऑन!!' (2008) जैसी फिल्मों से अपनी पहचान बनाई। 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' (2011) और 'भाग मिल्खा भाग' (2013) में उनके प्रदर्शन ने उन्हें कई पुरस्कार दिलाए।


फरहान का खेलों के प्रति प्रेम उनके पेशेवर जीवन में भी झलकता है। वे अक्सर शूटिंग के बीच क्रिकेट या फुटबॉल खेलते हैं, और कहते हैं कि ये खेल उन्हें ताजगी और ऊर्जा प्रदान करते हैं।


इसके अलावा, फरहान ने संगीत में भी अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने 'सेनोरिटा', 'तुम हो तो', और 'सोचा है' जैसे गानों से अपनी संगीत प्रतिभा को साबित किया है। उन्होंने एक्सल एंटरटेनमेंट नामक प्रोडक्शन हाउस की भी स्थापना की है।


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