पल्लवी चटर्जी की फिल्म 'शोलवाला': एक नई सोच के साथ दर्शकों का दिल जीतने की कहानी
पल्लवी चटर्जी का फिल्मी सफर और 'शोलवाला' की सफलता
मुंबई, 23 अप्रैल। बंगाली सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री पल्लवी चटर्जी ने न केवल अभिनय में बल्कि फिल्म निर्माण में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई है। एक विशेष बातचीत में, उन्होंने अपने करियर और फिल्म 'शोलवाला' की सफलता के बारे में विस्तार से बताया।
पल्लवी ने साझा किया कि उन्होंने प्रोडक्शन की दुनिया में कदम काफी पहले रखा था। उन्होंने कहा, "मेरे प्रोडक्शन का पहला प्रोजेक्ट 'साहिबा बीबी गुलाम' था, जिसे सहारा के लिए बनाया गया था। उस समय मैंने प्रोडक्शन के साथ-साथ क्रिएटिव डायरेक्टर और स्क्रीनप्ले राइटर की भूमिका भी निभाई। तब से, मेरा सफर एक कलाकार और निर्माता के रूप में समानांतर चलता रहा है।"
उन्होंने बताया कि उनकी फिल्म 'शोलवाला' को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना मिली। फिल्म की प्रेरणा के बारे में बात करते हुए, पल्लवी ने कहा, "पुराने समय में कश्मीर से शॉल बेचने वाले लोग बेझिझक घरों में आते थे और लोग उन पर आंख मूंदकर भरोसा करते थे।"
फिल्म के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा, "आज के समय में पहचान और दस्तावेज सबसे महत्वपूर्ण हो गए हैं। बिना सही कागजात के किसी पर शक किया जा सकता है। हमारी फिल्म इसी मानवीय भावना और सीमा सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है।"
पल्लवी ने यह भी कहा कि उनकी फिल्म को विभिन्न फेस्टिवल्स में सराहना मिली, लेकिन आर्थिक सफलता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म के प्रभाव पर भी चर्चा की, यह कहते हुए कि अब कंटेंट ही असली राजा है। विदेशी दर्शक फिल्म के बजट की बजाय उसकी कहानी को महत्व देते हैं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या ओटीटी प्लेटफॉर्म छोटी फिल्मों को आगे बढ़ने का सही मौका देते हैं, तो उन्होंने उत्तर दिया, "फिल्म बनाना हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है। बड़े बजट की फिल्मों के लिए यह थोड़ा आसान हो सकता है, लेकिन अच्छी कहानियां हमेशा अपनी जगह बना लेती हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म अच्छी कहानियों के लिए हमेशा खुले रहते हैं। अगर कोई फिल्म अच्छी बनी है, तो उसे कोई न कोई प्लेटफॉर्म मिल ही जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप ऐसा कुछ बनाएं जिस पर आपको खुद भरोसा हो।"
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