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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जसबीर सिंह को दी जमानत, जानें क्या हैं आरोप?

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जसबीर सिंह को जमानत दे दी है, जिन पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संपर्क रखने का आरोप था। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसियों ने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। जानें इस मामले की पूरी कहानी और कोर्ट के निर्णय के पीछे की वजहें।
 
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जसबीर सिंह को दी जमानत, जानें क्या हैं आरोप?

जसबीर सिंह को मिली राहत


चंडीगढ़, 29 अप्रैल। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने जसबीर सिंह को नियमित जमानत प्रदान की है। उन पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ संपर्क रखने और संवेदनशील जानकारी साझा करने के गंभीर आरोप लगे थे। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि जांच एजेंसियों ने अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया है, जिससे यह सिद्ध हो सके कि जसबीर ने किसी विदेशी एजेंसी को देश की सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी दी।


मामले का विवरण

यह मामला 3 जून 2025 को तब शुरू हुआ जब मोहाली के स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (एसएसओसी) में जसबीर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने आरोप लगाया कि वह आईएसआई से जुड़े व्यक्तियों के संपर्क में था और भारतीय सेना की गतिविधियों से संबंधित संवेदनशील जानकारियां साझा कर रहा था।


जांच एजेंसियों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित गंभीर मामला मानते हुए कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया। मामले की सुनवाई जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज की अदालत में हुई। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला मुख्य रूप से गुप्त सूचना और आरोपी के कथित बयानों पर आधारित है।


कोर्ट का निर्णय

जसबीर के मोबाइल डेटा की जांच में कोई चैट रिकॉर्ड, मैसेज या संदिग्ध संपर्क नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि वह किसी पाकिस्तानी नागरिक या एजेंसी से जुड़ा हुआ था। अदालत ने उन वीडियो का भी उल्लेख किया, जिनके आधार पर मामला दर्ज किया गया था। ये वीडियो भाखड़ा डैम और मोहाली एयरपोर्ट जैसी सार्वजनिक जगहों से संबंधित थे, जिनमें कोई गोपनीय जानकारी नहीं थी।


बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि जसबीर एक ट्रैवल व्लॉगर है और अपने यूट्यूब चैनल 'जान महल' पर यात्रा से जुड़े वीडियो अपलोड करता है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उसके मोबाइल में पाकिस्तानी नंबर होने का कारण यह है कि वह पहले नॉर्वे में रह चुका है, जहां कई पाकिस्तानी परिवार रहते हैं।


जमानत की शर्तें

अदालत ने कहा कि जसबीर पिछले दस महीनों से न्यायिक हिरासत में था और उसके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। अब तक की जांच में आरोपों को मजबूत करने वाला कोई ठोस सबूत नहीं मिला। इसी आधार पर उसे जमानत दी गई। हालांकि, हाईकोर्ट ने कुछ शर्तें भी लगाई हैं, जिसमें यह शामिल है कि जसबीर किसी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा और न ही किसी को धमकी देगा।


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