दिलजीत दोसांझ: गुरुद्वारे से ग्लोबल स्टेज तक का सफर
दिलजीत दोसांझ का अद्भुत सफर
मुंबई, 5 जनवरी। पंजाबी संगीत और सिनेमा के उभरते सितारे दिलजीत दोसांझ आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनकी आवाज में बचपन से ही एक खास जादू था, जो लोगों के दिलों को छू लेता था। बहुत से लोग नहीं जानते कि उन्होंने गायकी की शुरुआत गुरुद्वारों में कीर्तन से की थी। यह अनुभव आज भी उनके संगीत और स्टेज परफॉर्मेंस में झलकता है।
दिलजीत का नाम अब केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर हो चुका है। उनके प्रशंसक उनकी आवाज और अभिनय दोनों के दीवाने हैं।
दिलजीत दोसांझ का जन्म 6 जनवरी 1984 को पंजाब के जालंधर जिले के छोटे से गांव दोसांझ कलां में हुआ था। उनका परिवार साधारण था और शुरुआती दिनों में उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसी कारण, उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए लुधियाना जाने का निर्णय लिया और वहां अपने रिश्तेदार के घर रहने लगे।
दिलजीत ने अपनी स्कूली शिक्षा यहीं पूरी की, लेकिन उनका मन हमेशा संगीत में लगा रहता था। वह अक्सर गुरुद्वारों में कीर्तन गाया करते थे। लोगों की सराहना ने उन्हें यह एहसास दिलाया कि उनकी आवाज में कुछ खास है।
गुरुद्वारे में गाने की शुरुआत ने उनके करियर की नींव रखी। धीरे-धीरे, वह शादियों और छोटे कार्यक्रमों में गाने लगे। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें जल्दी ही पहचान दिलाई। 2003 में, उन्होंने अपना पहला एल्बम 'इश्क दा उड़ा अड़ा' रिलीज किया, जिसने उन्हें पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में एक नई पहचान दिलाई। इसके बाद उनके दूसरे एल्बम 'स्माइल' और 2009 में 'द नेक्स्ट लेवल' ने भी सफलता हासिल की। उनके हिट गानों में 'पटियाला पैग', 'लवर', और 'प्रॉपर पटोला' शामिल हैं।
गुरुद्वारे से मिली संगीत की शिक्षा उनके गानों में हमेशा झलकती रही है। उनकी गायिकी में एक भावपूर्ण शैली है, जो दर्शकों को जोड़ती है। यही कारण है कि उनके लाइव कॉन्सर्ट्स में टिकट मिलना मुश्किल होता है और अगर मिलते भी हैं, तो उनकी कीमतें काफी ऊंची होती हैं। उनका फैन बेस उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में फैला हुआ है।
एक अभिनेता के रूप में भी दिलजीत ने अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने 2011 में पंजाबी फिल्म 'द लायन ऑफ पंजाब' से अभिनय की शुरुआत की। इसके बाद उनकी कई हिट फिल्में आईं, जैसे 'जट्ट एंड जूलिएट', 'सुपर सिंघ', और 'अंबरसरिया'। बॉलीवुड में उनकी शुरुआत 2016 में क्राइम थ्रिलर 'उड़ता पंजाब' से हुई, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला और सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए नामांकित किया गया।
इसके बाद उन्होंने 'गुड न्यूज' और 'अमर सिंह चमकीला' जैसी फिल्में कीं, जो दर्शकों और आलोचकों दोनों की पसंदीदा रहीं। दिलजीत दोसांझ ने समाज सेवा में भी योगदान दिया है। 2013 में, उन्होंने सांझ फाउंडेशन की स्थापना की, जो बच्चों और बुजुर्गों की मदद करता है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
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