तनुश्री दत्ता ने नाना पाटेकर के निधन के बाद Me Too आंदोलन पर खोला अपना दिल
तनुश्री दत्ता का बड़ा बयान
अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद, एक्ट्रेस तनुश्री दत्ता ने Me Too आंदोलन से जुड़े अपने अनुभवों को साझा करते हुए एक महत्वपूर्ण वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर कहा कि इस आंदोलन के बाद उनकी जिंदगी में कई कठिनाइयाँ आईं। तनुश्री ने यह भी बताया कि उन्हें जान का खतरा महसूस होता था और कुछ लोग उनका पीछा करते थे। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि साल 2024 में किसी ने उनकी कार के ब्रेक काट दिए थे।
‘लोग नहीं जानते मेरे साथ क्या हुआ’
तनुश्री ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में कहा कि लोग नहीं जानते कि Me Too आंदोलन के बाद उनके साथ क्या-क्या हुआ। उन्होंने बताया कि आंदोलन से पहले वह नियमित रूप से वर्कआउट करती थीं और बिना किसी डर के कहीं भी जा सकती थीं।
सुरक्षा को लेकर चिंता
एक्ट्रेस ने कहा कि पहले उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता नहीं होती थी, लेकिन आंदोलन के बाद सब कुछ बदल गया। उन्होंने बताया कि कई घटनाएँ हुईं, जिनके बारे में वह विस्तार से नहीं बता सकतीं। तनुश्री ने कहा कि Me Too आंदोलन के बाद उन्हें लगातार असुरक्षा का अनुभव हुआ और कुछ लोग उनके पीछे लगे रहते थे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती।
2024 में कार के ब्रेक काटने का आरोप
वीडियो में, तनुश्री ने कहा कि साल 2024 में किसी ने उनकी कार के ब्रेक काट दिए थे। उन्होंने बताया कि आंदोलन के बाद उनके साथ कई घटनाएँ हुईं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। एक्ट्रेस ने कहा कि लोग उनके अनुभवों और परेशानियों को नहीं समझते।
नाना पाटेकर पर आरोप
तनुश्री ने 2008 में फिल्म ‘हॉर्न ओके प्लीज’ की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर पर अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया था। 2018 में, उन्होंने इन आरोपों को फिर से उठाया था, जब Me Too आंदोलन भारत में शुरू हुआ। उस समय नाना पाटेकर ने इन आरोपों का खंडन किया था। इस मामले ने फिल्म उद्योग में महिलाओं की सुरक्षा और उनके साथ होने वाले व्यवहार पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया।
Me Too आंदोलन पर फिर से चर्चा
नाना पाटेकर के निधन की खबर के बाद, तनुश्री दत्ता का यह बयान फिर से 2008 के आरोपों और 2018 के Me Too आंदोलन से जुड़े विवाद को चर्चा में लाया है। उनके वीडियो में किए गए गंभीर दावे को उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के रूप में देखा जाना चाहिए। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और अन्य पक्षों की प्रतिक्रिया के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
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