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जैकी श्रॉफ ने राजेंद्र कुमार और गीता दत्त को दी श्रद्धांजलि, जानें क्यों है खास ये पोस्ट!

जैकी श्रॉफ ने अपने सोशल मीडिया पर दिग्गज अभिनेता राजेंद्र कुमार की जयंती और मशहूर गायिका गीता दत्त की पुण्यतिथि पर भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने दोनों कलाकारों की याद में खास पोस्ट साझा किया, जिसमें राजेंद्र कुमार की तस्वीर के साथ मोहम्मद रफ़ी का गीत भी शामिल था। जानें इस पोस्ट में और क्या खास था और फैंस ने कैसे प्रतिक्रिया दी।
 

जैकी श्रॉफ का भावुक श्रद्धांजलि पोस्ट


मुंबई, 20 जुलाई। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता जैकी श्रॉफ, जिन्हें 'जग्गू दादा' के नाम से जाना जाता है, ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पर एक खास पोस्ट साझा किया। इस पोस्ट में उन्होंने दिग्गज अभिनेता राजेंद्र कुमार की जयंती और प्रसिद्ध गायिका गीता दत्त की पुण्यतिथि को याद किया।


जैकी ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर राजेंद्र कुमार की एक पुरानी ब्लैक-एंड-व्हाइट तस्वीर साझा की, जिसमें उन्होंने लिखा, 'राजेंद्र कुमार जी की जयंती पर उन्हें याद कर रहा हूं।' साथ ही, उन्होंने हाथ जोड़ने वाली इमोजी भी जोड़ी। इस पोस्ट को और भी खास बनाने के लिए उन्होंने मोहम्मद रफ़ी का प्रसिद्ध गीत 'मेरे महबूब तुझे मेरी मोहब्बत की कसम' बैकग्राउंड में लगाया, जिसने पुरानी यादों को ताजा कर दिया।


इसके बाद, जैकी ने गीता दत्त को भी उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने गीता दत्त की एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'गीता दत्त जी' और हाथ जोड़ने वाली इमोजी लगाई। इसके साथ ही, उन्होंने उनकी जन्म और निधन की तारीखें भी साझा की – '23 नवंबर 1930 – 20 जुलाई 1972'।


जैकी की इन भावुक पोस्ट्स को फैंस ने बहुत सराहा और कई लोगों ने कमेंट्स के जरिए इन दोनों दिग्गज कलाकारों को श्रद्धांजलि दी।


राजेंद्र कुमार, जिन्हें 'जुबली कुमार' के नाम से भी जाना जाता है, ने 1960 के दशक में कई सफल फिल्में दीं। उनका जन्म 20 जुलाई 1929 को हुआ था और उन्होंने 'मदर इंडिया', 'गूंज उठी शहनाई', 'धूल का फूल', 'मेरे महबूब', 'संगम', 'आरजू', 'सूरज' और 'झुक गया आसमान' जैसी क्लासिक फिल्मों में काम किया। उनका निधन 12 जुलाई 1999 को हुआ।


वहीं, गीता दत्त भारतीय फिल्म संगीत की एक अद्वितीय आवाज मानी जाती हैं। उन्होंने कई ऐसे गीत गाए हैं जो आज भी लोगों के दिलों को छूते हैं। 'वक्त ने किया क्या हसीं सितम', 'बाबूजी धीरे चलना', 'जाने क्या तूने कही', 'मेरा सुंदर सपना बीत गया' और 'ना जाओ सैंया छुड़ा के बैयां' जैसे गीत आज भी लोकप्रिय हैं। गीता दत्त का निधन 20 जुलाई 1972 को महज 41 वर्ष की उम्र में हुआ।


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