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जितेंद्र का करियर कैसे बदला 'परिचय' ने? जानें इस फिल्म की अनकही कहानी!

जितेंद्र, जिनका असली नाम रवि कुमार है, ने अपने करियर में 200 से अधिक फिल्में की हैं। लेकिन 1972 में आई फिल्म 'परिचय' ने उनके करियर को एक नई दिशा दी। इस फिल्म ने उन्हें एक नए अवतार में प्रस्तुत किया, जहां उन्होंने गंभीरता के साथ अभिनय किया। जानें इस फिल्म की अनकही कहानी और कैसे इसने जितेंद्र के करियर को नया जीवन दिया।
 
जितेंद्र का करियर कैसे बदला 'परिचय' ने? जानें इस फिल्म की अनकही कहानी!

जितेंद्र का नया अवतार




मुंबई, 6 अप्रैल। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ ऐसे अदाकार हैं जिन्होंने न केवल दर्शकों का दिल जीता, बल्कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की दिशा भी बदल दी।


उनमें से एक हैं जितेंद्र, जिनका असली नाम रवि कुमार है। उन्होंने अपने करियर में 200 से अधिक फिल्मों में काम किया, लेकिन 1972 में आई फिल्म 'परिचय' ने उनके करियर को एक नई दिशा दी। यह फिल्म उनके लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुई।


गुलज़ार द्वारा निर्देशित 'परिचय' ने जितेंद्र को एक नई पहचान दी। जब उन्होंने अपनी 'जंपिंग जैक' की छवि को छोड़कर गंभीरता के साथ अभिनय किया, तो दर्शकों ने उन्हें एक नए रूप में देखा। 'मुसाफिर हूँ यारों' के गाने पर थिरकते हुए, जितेंद्र ने साबित किया कि वे केवल एक स्टार नहीं, बल्कि एक कुशल अभिनेता भी हैं।


'परिचय' फिल्म में जितेंद्र के लिए चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि उद्योग में उनकी छवि केवल एक अच्छे डांसर की थी। जब गुलजार ने उन्हें इस फिल्म के लिए साइन किया, तो कई लोगों ने कहा कि वे केवल लकड़ी के लट्ठे जैसे हैं। खुद जितेंद्र को भी इस भूमिका के लिए खुद को तैयार करने में कठिनाई महसूस हुई।


गुलज़ार ने उन्हें बिना डायलॉग के केवल आंखों और चेहरे के भावों से अभिनय करने का अभ्यास करने के लिए कहा। इस तकनीक ने काम किया और फिल्म में उनके किरदार ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 'परिचय' एक क्लासिक फैमिली ड्रामा बन गई और साल की सफल फिल्मों में शामिल हुई।


हालांकि 1972 से पहले भी जितेंद्र की फिल्में सफल थीं, लेकिन उनमें उनका किरदार अक्सर एक मनचले लड़के का होता था। 'परिचय' ने उनके करियर को एक नया मोड़ दिया।


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