गोविंदा का लोकल ट्रेन का किस्सा: जब मां ने चिल्लाकर मचाया था हंगामा!
गोविंदा की यादें: लोकल ट्रेन में गिरने का अनुभव
मुंबई, 1 जनवरी। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता गोविंदा ने अपने करियर की शुरुआत के दिनों में कई संघर्षों का सामना किया है। एक पुराने इंटरव्यू में, उन्होंने मुंबई की लोकल ट्रेन से जुड़ी एक दिलचस्प घटना साझा की। गोविंदा ने बताया कि कैसे उन्होंने आम लोगों की तरह यात्रा की और मुंबई की असली जिंदगी का अनुभव किया।
उन्होंने कहा, ''मेरे करियर की शुरुआत में, मैंने लोकल ट्रेन में सफर किया। यह ट्रेन मुंबई की धड़कन है। एक बार, जब मैं चर्चगेट गया, तो भीड़ भरी ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहा था। उस समय मेरी उम्र लगभग 18 या 19 साल थी, और मैं काफी फिट था। मुझे फुटबॉल खेलने का शौक था।''
गोविंदा ने आगे बताया, ''चर्चगेट जाना मेरे लिए नया अनुभव था। पहले मैं अपने भाइयों के साथ गया और फिर अपनी मां को भी साथ ले गया। लेकिन ट्रेन की भीड़ इतनी ज्यादा थी कि चढ़ते समय मेरा संतुलन बिगड़ गया और मैं गिर पड़ा। यह मेरे लिए सामान्य था, लेकिन मेरी मां के लिए यह बहुत डरावना था।''
उन्होंने कहा, ''जैसे ही मैं गिरा, मेरी मां घबरा गईं और मदद के लिए चिल्लाने लगीं, 'मेरा बच्चा! मेरा बच्चा!' यह सुनकर स्टेशन पर लोग घबरा गए और देखने लगे कि क्या हुआ। जब उन्होंने देखा कि गिरने वाला कोई छोटा बच्चा नहीं, बल्कि एक मजबूत जवान लड़का है, तो सबको आश्चर्य हुआ।''
गोविंदा ने मुस्कुराते हुए कहा, ''मैं भले ही जवान था, लेकिन मैं हमेशा अपनी मां के लिए उनका छोटा बच्चा रहूंगा।''
इस बातचीत में, गोविंदा ने अपने जीवन के सफर के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, ''मैंने विरार से मुंबई का सफर 21 सालों में तय किया। गांव में सब जानते थे कि मैं अपनी मां के बहुत करीब हूं। मेरी मां मुझसे रोजाना काम करवाती थीं और मैं बिना किसी शिकायत के सब कुछ करता था। गांव के लोग मजाक में कहते थे कि मां मुझे बहू की तरह रखती हैं।''
उन्होंने कहा, ''उस समय मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं एक दिन अभिनेता बनूंगा। मैं एक छोटे शहर में पढ़ाई कर रहा था और डांस का शौक था। जब मैं मुंबई आया, तो संघर्ष शुरू हुआ, लेकिन किस्मत ने मेरा साथ दिया और मुझे जल्दी ही पहली फिल्म मिल गई।''
अभिनेता ने कहा, ''जब मैं पहली बार हीरो बना, तो सच में खुशी महसूस हुई। आज इतने सालों बाद भी जब मैं अपने शुरुआती संघर्ष और लोकल ट्रेन के दिनों को याद करता हूं, तो वह समय मेरे जीवन का सबसे खूबसूरत मोड़ लगता है।''
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