गुलशन ग्रोवर: बॉलीवुड के 'बैडमैन' की संघर्ष भरी कहानी
गुलशन ग्रोवर का अद्वितीय सफर
हिंदी सिनेमा में कई ऐसे अभिनेता हैं जिन्होंने अपने नकारात्मक किरदारों से दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई है। गुलशन ग्रोवर भी इन्हीं में से एक हैं। 80 और 90 के दशक में उन्होंने कई खतरनाक विलेन के रूप में अपनी पहचान बनाई, जिसके चलते उन्हें 'बैडमैन' के नाम से जाना जाने लगा।
हालांकि, गुलशन की कहानी केवल फिल्मों तक सीमित नहीं है। उनका प्रारंभिक जीवन कई संघर्षों से भरा रहा। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद, उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अभिनय को अपने करियर के रूप में अपनाने का निर्णय लिया। उनके जन्मदिन पर, आइए जानते हैं उनके जीवन के कुछ दिलचस्प पहलुओं।
बचपन से ही अभिनय का जुनून
गुलशन ग्रोवर का जन्म 21 सितंबर 1955 को नई दिल्ली में हुआ। उन्हें बचपन से ही अभिनय में रुचि थी। स्कूल के दिनों में उन्होंने रामलीला में भाग लेना शुरू कर दिया था। तीसरी कक्षा में पढ़ते हुए उन्होंने अभिनय की शुरुआत की। जैसे-जैसे वे बड़े हुए, उनका यह शौक और भी मजबूत होता गया। कॉलेज के दौरान भी वे थिएटर से जुड़े रहे और श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से पढ़ाई की। इसी दौरान उन्होंने लिटिल थिएटर ग्रुप में शामिल होकर अभिनय को पेशे के रूप में अपनाने का निर्णय लिया।
स्कूल की फीस के लिए सामान बेचना
गुलशन ग्रोवर एक बड़े परिवार से आते हैं, जिसमें सात भाई-बहन हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि सभी बच्चों की पढ़ाई आसानी से हो सके। इसलिए, उन्होंने छोटी उम्र में काम करना शुरू कर दिया। कहा जाता है कि स्कूल जाने से पहले वे घर-घर जाकर डिटर्जेंट पाउडर और फिनाइल की गोलियां बेचते थे, जिससे वे अपनी स्कूल फीस भरते थे। इस संघर्ष ने उनके व्यक्तित्व को मजबूत बनाया।
सनी देओल और संजय दत्त को दी एक्टिंग की ट्रेनिंग
मुंबई आने के बाद, गुलशन ग्रोवर ने रोशन तनेजा स्कूल ऑफ एक्टिंग में प्रशिक्षण लिया। यहां उन्होंने न केवल अभिनय सीखा, बल्कि अन्य कलाकारों को भी अभिनय सिखाकर अपनी आजीविका कमाई। उन्होंने संजय दत्त और सनी देओल जैसे कलाकारों को भी अभिनय की बारीकियां सिखाईं। इसके अलावा, टीना मुनीम और कुमार गौरव भी उनके छात्रों में शामिल रहे।
‘रॉकी’ से मिली पहचान, फिर बने ‘बैडमैन’
गुलशन ग्रोवर ने 1980 में फिल्म ‘हम पांच’ से बॉलीवुड में कदम रखा। इससे पहले, वे दूरदर्शन के कार्यक्रम ‘फूल खिले हैं गुलशन गुलशन’ में भी दिखाई दिए थे। 1981 में आई फिल्म ‘रॉकी’ से उन्हें व्यापक पहचान मिली। इसके बाद, उन्होंने कई फिल्मों में विलेन के किरदार निभाए। 1989 में आई ‘राम लखन’ में उनका किरदार केसरिया विलायती बेहद लोकप्रिय हुआ। इस फिल्म में उनके 'बैडमैन' अंदाज ने उन्हें इस नाम से मशहूर कर दिया।
उन्होंने अपने करियर में 400 से अधिक फिल्मों में काम किया है। ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’, ‘सदमा’, ‘यस बॉस’, ‘लज्जा’, ‘राम जाने’, ‘सूर्यवंशी’ और ‘दिलवाले’ जैसी फिल्मों में उनके किरदारों को दर्शकों ने लंबे समय तक याद रखा।
बॉलीवुड के साथ हॉलीवुड में भी किया काम
गुलशन ग्रोवर ने केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में भी काम किया। ‘द सेकेंड जंगल बुक’, ‘एयर पैनिक’, ‘बीपर’, ‘अमेरिकन डेलाइट’ और ‘डेस्परेट एंडेवर्स’ जैसी हॉलीवुड फिल्मों में भी वे नजर आए। इस तरह, उन्होंने भारतीय सिनेमा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई।
दो शादियां, लेकिन दोनों रिश्ते नहीं चल सके
गुलशन ग्रोवर की निजी जिंदगी भी उनके फिल्मी सफर की तरह चर्चा में रही। उन्होंने दो शादियां कीं, लेकिन दोनों रिश्ते ज्यादा समय तक नहीं चल सके। उन्होंने 1998 में फिलोमिना ग्रोवर से शादी की, लेकिन तीन साल बाद उनका तलाक हो गया। इसके बाद, उन्होंने 2002 में कशिश ग्रोवर से दूसरी शादी की, लेकिन यह रिश्ता भी लंबे समय तक नहीं चला।
गुलशन ग्रोवर ने अपने दमदार विलेन किरदारों से पहचान बनाई है और उनकी निजी और पेशेवर जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। संघर्ष से शुरू होकर बॉलीवुड के 'बैडमैन' बनने तक का उनका सफर हिंदी सिनेमा की एक महत्वपूर्ण कहानी है।
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