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गुलशन कुमार की विरासत: कैसे एक भक्ति गीत ने बनाया नया रिकॉर्ड?

गुलशन कुमार ने संगीत जगत में एक नई दिशा दी, और उनकी विरासत आज भी जीवित है। 'श्री हनुमान चालीसा' का वीडियो 5 अरब व्यूज पार कर चुका है, जो उनकी दूरदर्शिता का प्रमाण है। जानें कैसे उन्होंने भक्ति संगीत को घर-घर पहुंचाया और उनकी विरासत आज भी शिक्षा और सिनेमा में जीवित है।
 

गुलशन कुमार का संगीत सफर


मुंबई, 11 अगस्त। गुलशन कुमार ने अपने जीवन में संगीत उद्योग को नई दिशा दी थी, लेकिन उनकी मृत्यु के 29 साल बाद, उनकी सबसे बड़ी कमाई किसी दुकान या फिल्म से नहीं, बल्कि एक ऐसे प्लेटफॉर्म से हो रही है जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। उन्हें 'कैसेट किंग' के नाम से जाना जाता था, और उन्होंने भक्ति संगीत को 1980 और 1990 के दशक में सस्ते कैसेटों के माध्यम से हर घर तक पहुंचाया। आज वही संगीत मोबाइल और इंटरनेट पर अरबों बार देखा जा रहा है।


श्री हनुमान चालीसा का डिजिटल सफर

इसका सबसे बड़ा उदाहरण 'श्री हनुमान चालीसा' का वीडियो है, जिसमें गुलशन कुमार नजर आते हैं। यह वीडियो मई 2011 में टी-सीरीज के भक्ति चैनल पर जारी हुआ और नवंबर 2025 में इसके व्यूज 5 अरब के पार चले गए। यानी गुलशन कुमार के निधन के लगभग 14 साल बाद, उनका चेहरा एक ऐसे डिजिटल रिकॉर्ड का हिस्सा बना, जो विश्वभर में चर्चा का विषय बन गया।


गुलशन कुमार की कारोबारी समझ

यहां बात सिर्फ 5 अरब व्यूज की नहीं है। दरअसल, यह वही बाजार है जिसे गुलशन कुमार ने अपने समय में पहचाना था। जब भारत में संगीत सुनने के लिए कैसेट खरीदे जाते थे, तब उन्होंने भक्ति संगीत के विशाल बाजार को समझ लिया था। टी-सीरीज ने शुरुआती वर्षों में भजन और धार्मिक गीतों के कैसेट बड़े पैमाने पर जारी किए। गुलशन कुमार की व्यावसायिक समझ यह थी कि संगीत केवल फिल्म देखने वालों की जरूरत नहीं है। मंदिर जाने वाले और घर में पूजा करने वाले लोग भी संगीत के बड़े ग्राहक हो सकते हैं।


डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गुलशन कुमार की विरासत

'श्री हनुमान चालीसा' के डिजिटल सफर की बात करें, तो वीडियो 10 मई 2011 को जारी हुआ और 2020 में एक अरब व्यूज पार किए। 2023 में यह तीन अरब तक पहुंचा और नवंबर 2025 में पांच अरब के पार चला गया। उस समय मीडिया ने इसे भारत का पहला ऐसा यूट्यूब अपलोड बताया, जिसने पांच अरब व्यूज का आंकड़ा पार किया। यह एक अद्भुत घटना थी। आमतौर पर किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका नाम किताबों या स्मारकों तक सीमित रहता है, लेकिन गुलशन कुमार के मामले में ऐसा नहीं हुआ। उनका नाम एक सक्रिय म्यूजिक लाइब्रेरी से जुड़ा रहा।


गुलशन कुमार की शिक्षा और सिनेमा में विरासत

गुलशन कुमार की विरासत का एक और पहलू इंस्टीट्यूट और पुरस्कारों के रूप में भी देखा जा सकता है। गुलशन कुमार फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का नाम उनके नाम पर रखा गया है। 2019 में टी-सीरीज की शैक्षिक शाखा ने गुलशन कुमार अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस और गुलशन कुमार यंग अचीवर्स अवॉर्ड की शुरुआत की थी, जिससे उनकी विरासत को शिक्षा के क्षेत्र में भी मान्यता मिली।


उनके नाम का एक और बड़ा उपयोग सिनेमा में होने वाला है। 'मोगुल' नामक फिल्म उनकी जिंदगी पर आधारित है, जिसका निर्माण लंबे समय से चल रहा है। इस प्रोजेक्ट में अक्षय कुमार और आमिर खान जैसे बड़े नाम जुड़े हैं। 2025 में इसे फिर से आगे बढ़ाने की खबर आई, लेकिन फिल्म अब भी अटकी हुई है।


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