Movie prime

गुजराती हास्य सम्राट तारक मेहता: एक अनोखी दृष्टि से समाज को देखने वाले लेखक

तारक मेहता, गुजराती साहित्य के प्रसिद्ध हास्य लेखक, ने समाज को 'उल्टे चश्मे' से देखने का अनूठा दृष्टिकोण अपनाया। उनकी लेखनी ने पाठकों को हंसाते हुए गंभीर मुद्दों पर सोचने के लिए प्रेरित किया। 80 से अधिक किताबों के लेखक, मेहता का प्रसिद्ध कॉलम 'दुनिया ने उंधा चश्मा' पर आधारित धारावाहिक 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' ने उन्हें और भी लोकप्रिय बना दिया। उनकी पुण्यतिथि 1 मार्च को है, और उनकी विरासत आज भी जीवित है।
 
गुजराती हास्य सम्राट तारक मेहता: एक अनोखी दृष्टि से समाज को देखने वाले लेखक

तारक मेहता का अनूठा दृष्टिकोण


मुंबई, 28 फरवरी। गुजराती साहित्य के प्रसिद्ध हास्य लेखक तारक जनुभाई मेहता ने समाज को 'उल्टे चश्मे' से देखने का अनूठा तरीका अपनाया। उनकी लेखनी ने समाज की कमियों पर हल्के-फुल्के व्यंग्य किए, लेकिन कभी भी कटुता का सहारा नहीं लिया। उनका मानना था कि हास्य में मिठास होनी चाहिए, जो पाठकों को हंसाते हुए सोचने पर मजबूर करे।


तारक मेहता की यह सोच उन्हें पाठकों और दर्शकों के बीच बेहद प्रिय बना गई। उनकी पुण्यतिथि 1 मार्च को मनाई जाती है।


तारक मेहता का जन्म 26 दिसंबर 1929 को अहमदाबाद, गुजरात में हुआ। उन्होंने अपनी लेखन यात्रा की शुरुआत गुजराती साहित्य और पत्रकारिता से की। मार्च 1971 में, उनके प्रसिद्ध कॉलम 'दुनिया ने उंधा चश्मा' का पहला अंक गुजराती साप्ताहिक 'चित्रलेखा' में प्रकाशित हुआ। इस कॉलम में वे रोजमर्रा के सामाजिक, राजनीतिक और पारिवारिक मुद्दों को एक अनोखे दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते थे।


उनकी लेखनी में व्यंग्य था, लेकिन वह कभी भी तीखा या आहत करने वाला नहीं था। एक बार उन्होंने कहा था, “मैं मुद्दों को उल्टे चश्मे से देखता हूं ताकि लोग हंसते-हंसते सोचें। हास्य में मिठास होनी चाहिए, जो दिल को छूए और बदलाव की प्रेरणा दे।” यही उनकी लेखन शैली का मूल मंत्र था, जिसने उन्हें गुजराती हास्य साहित्य का चेहरा बना दिया।


तारक मेहता ने 80 से अधिक किताबें लिखीं, जिनमें से अधिकांश उनके कॉलम पर आधारित थीं। उन्होंने गुजराती थिएटर में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया, कई हास्य नाटकों का अनुवाद किया और नाटकों के माध्यम से संदेश पहुंचाया।


उनका करियर विविधतापूर्ण रहा। 1958 में, वह गुजराती नाट्य मंडल से जुड़े और बाद में दैनिक 'प्रजातंत्र' के डिप्टी एडिटर बने। इसके बाद, भारत सरकार के सूचना और प्रसारण विभाग में कंटेंट राइटर और अधिकारी के रूप में कार्य किया। इस दौरान उनकी हास्य लेखनी जारी रही।


2008 में, असित कुमार मोदी ने उनके कॉलम 'दुनिया ने उंधा चश्मा' पर आधारित धारावाहिक 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' शुरू किया। यह शो सोनी सब पर प्रसारित होता है और भारत के सबसे लंबे चलने वाले कॉमेडी सीरियलों में से एक है। गोकुलधाम सोसायटी के किरदारों के माध्यम से रोजमर्रा की जिंदगी की छोटी-छोटी बातों को हास्य के साथ प्रस्तुत किया जाता है। इस शो में तारक मेहता का किरदार शैलेश लोढ़ा ने निभाया है।


तारक मेहता के योगदान को भारत सरकार ने भी सराहा। 2015 में, उन्हें साहित्य के क्षेत्र में पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया। उनका निधन 1 मार्च 2017 को लंबी बीमारी के बाद अहमदाबाद में 87 वर्ष की आयु में हुआ, लेकिन उनकी कलम आज भी जीवित है और 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के माध्यम से लोगों को गुदगुदाती है।


OTT