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क्या है श्वेता त्रिपाठी की नई फिल्म 'पलकों पे' का खास संदेश?

श्वेता त्रिपाठी की नई फिल्म 'पलकों पे' समाज के संवेदनशील मुद्दों को उजागर करती है। इस फिल्म में तलाक, लैंगिक समानता, यौन पहचान और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर चर्चा की गई है। श्वेता ने फिल्म के शूटिंग अनुभव को साझा करते हुए इसे चुनौतीपूर्ण बताया और निर्देशक निधिश पुझक्कल की तारीफ की। जानें इस फिल्म के बारे में और क्या खास है।
 
क्या है श्वेता त्रिपाठी की नई फिल्म 'पलकों पे' का खास संदेश?

समाज के मुद्दों पर प्रकाश डालती 'पलकों पे'

मुंबई, 8 जनवरी। समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर करने वाली फिल्मों का एक विशेष महत्व होता है। ये फिल्में न केवल दर्शकों का मनोरंजन करती हैं, बल्कि उन संवेदनशील मुद्दों को भी सामने लाती हैं, जिन पर आमतौर पर चर्चा नहीं होती। अभिनेत्री श्वेता त्रिपाठी अपनी नई फिल्म 'पलकों पे' के माध्यम से ऐसे ही मुद्दों को उजागर कर रही हैं।

श्वेता ने एक इंटरव्यू में शूटिंग के अनुभव को साझा करते हुए इसे चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, ''शूटिंग का यह सफर कई दिनों तक चला। यह एक लंबा शेड्यूल था, जिसने हमारी टीम को और भी करीब ला दिया। कलाकारों और तकनीकी टीम के बीच जो समझ बनी, वह फिल्म में स्पष्ट रूप से नजर आएगी। एक-दूसरे की मदद करना इस प्रक्रिया में नई ऊर्जा का संचार करता है।''

फिल्म 'पलकों पे' के बारे में श्वेता ने कहा, "मुझे इसकी कहानी ने सबसे ज्यादा आकर्षित किया। यह फिल्म उन सवालों का सामना करती है, जिनसे समाज अक्सर मुंह मोड़ लेता है। तलाक, लैंगिक समानता, यौन पहचान और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दे इस फिल्म में ईमानदारी से उठाए गए हैं। ये ऐसे विषय हैं जिन पर लोग आमतौर पर बात करने से कतराते हैं। इस फिल्म में इन मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है।"

उन्होंने निर्देशक निधिश पुझक्कल की तारीफ करते हुए कहा, "उनका दृष्टिकोण इसे और भी खास बनाता है। वह हर सीन, खामोशी और भावना को एक मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखते हैं। ऐसे निर्देशन में काम करना किसी अभिनेता का सपना होता है, जिससे कलाकार अपने किरदार की गहराई में उतर सकता है।"

फिल्म में श्वेता के साथ अभिषेक चौहान और ईशान नकवी भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।

श्वेता ने सह-कलाकारों के साथ काम करने के अनुभव को साझा करते हुए कहा, ''अभिषेक और ईशान दोनों ही बेहद समर्पित कलाकार हैं। उनका समर्पण कठिन दिनों को भी सार्थक बना देता है। सभी ने मेहनत और दिल से काम किया, जिससे फिल्म का हर सीन प्राकृतिक और प्रामाणिक नजर आता है।''


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