Movie prime

क्या है 'शब्दोत्सव 2026' में भाषा सुम्बुली का धर्म और संस्कृति पर अनोखा दृष्टिकोण?

दिल्ली में आयोजित 'शब्दोत्सव 2026' में अभिनेत्री भाषा सुम्बुली ने धर्म, संस्कृति और राष्ट्रवाद पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे धर्म और संस्कृति समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भाषा ने यह भी कहा कि नई पीढ़ी अब इन विषयों की ओर आकर्षित हो रही है, जो एक सकारात्मक संकेत है। उनके अनुभवों और विचारों से यह स्पष्ट होता है कि बड़े पर्दे पर इन विषयों को सही तरीके से प्रस्तुत करना न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह समाज में जागरूकता और गौरव लौटाने का भी कार्य करता है।
 
क्या है 'शब्दोत्सव 2026' में भाषा सुम्बुली का धर्म और संस्कृति पर अनोखा दृष्टिकोण?

दिल्ली में 'शब्दोत्सव 2026' का आयोजन




नई दिल्ली, 4 जनवरी। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'शब्दोत्सव 2026' में कई प्रमुख साहित्यिक और फिल्मी हस्तियों ने भाग लिया। इस अवसर पर, अभिनेत्री भाषा सुम्बुली ने धर्म, संस्कृति और राष्ट्रवाद पर अपने विचार साझा किए। उनका मानना है कि फिल्मों में केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति की वास्तविकता भी दर्शाई जानी चाहिए।


भाषा ने बातचीत में कहा, "धर्म और संस्कृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं, और राष्ट्रवाद कभी भी धर्म के खिलाफ नहीं होता। धर्म में आस्था और निष्ठा से ही समाज का विकास संभव है।"


उन्होंने आगे कहा, "मेरे जीवन में धर्म का एक महत्वपूर्ण स्थान है, और इसी कारण मैं आज इस मुकाम पर हूं। वर्तमान समाज गर्व से कहता है कि वह धार्मिक है, और यह बदलाव एक क्रांतिकारी कदम है। नई पीढ़ी भी अब धर्म और संस्कृति की ओर आकर्षित हो रही है, जो एक सकारात्मक संकेत है।"


भाषा ने फिल्मों के माध्यम से धर्म और संस्कृति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "लोग ऐसी फिल्में देखना पसंद करते हैं जो उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को दर्शाती हैं। उदाहरण के लिए, गांवों में रामलीला का आयोजन आज भी होता है। दर्शक भले ही घटनाओं को जानते हों, लेकिन उसमें जो भावनात्मक जुड़ाव है, वह उन्हें प्रभावित करता है।"


उन्होंने कहा, "जब लोगों की सांस्कृतिक चेतना जागृत होती है, तो समाज का गौरव लौटता है, और यही विकास की दिशा में एक कदम होता है।"


भाषा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "2010 में जब मैं दिल्ली के राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में पढ़ाई कर रही थी, तब मुझे भारतीय संस्कृति और इतिहास से अवगत कराने के लिए ऐतिहासिक स्थलों पर ले जाया गया। उस समय मेरे मन में कई सवाल थे।"


उन्होंने कहा, "मैं कश्मीरी हिंदू हूं। यह सवाल तब समाप्त हुआ जब मैं अपनी मां के साथ बनारस गई और दशाश्वमेध घाट पर पहली बार गंगा आरती देखी। इस अनुभव ने मुझे भ्रम से बाहर निकाला और भारतीय संस्कृति की वास्तविकता को समझने का अवसर दिया। यह मेरे लिए एक जादुई अनुभव था।"


भाषा सुम्बुली ने कहा, "धर्म, संस्कृति और राष्ट्रवाद का सही मिश्रण समाज के लिए मार्गदर्शक हो सकता है। बड़े पर्दे पर इन विषयों को सही तरीके से प्रस्तुत करना न केवल मनोरंजन करता है, बल्कि लोगों की सोच और जागरूकता को भी बढ़ाता है। फिल्में और थिएटर समाज में चेतना और गौरव लौटाने का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकते हैं।"


OTT