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क्या है बांसुरी वादक नवीन कुमार की नई किताब 'द जर्नी ऑफ बांसुरी' में खास?

बांसुरी वादक नवीन कुमार ने हाल ही में अपनी पहली पुस्तक 'द जर्नी ऑफ बांसुरी' का विमोचन किया। इस किताब में उनकी संगीत यात्रा और बांसुरी के प्रति उनके गहरे जुड़ाव की कहानी है। मुंबई में आयोजित एक समारोह में सुभाष घई, सुखविंदर सिंह और शिवमणि जैसे कलाकारों ने भी भाग लिया। जानें इस किताब में और क्या खास है और नवीन कुमार ने अपने परिवार और प्रेरणाओं के बारे में क्या कहा।
 
क्या है बांसुरी वादक नवीन कुमार की नई किताब 'द जर्नी ऑफ बांसुरी' में खास?

नवीन कुमार की किताब का विमोचन


नई दिल्ली, 6 अप्रैल। आदित्य धर द्वारा निर्देशित फिल्म 'धुरंधर 2' के कलाकारों की सराहना हो रही है, वहीं इस फिल्म में बांसुरी बजाने वाले नवीन कुमार ने अपनी पुस्तक 'द जर्नी ऑफ बांसुरी' का विमोचन किया। उन्होंने बताया कि यह किताब उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है और उनके दिल के करीब है।


नवीन कुमार ने अपनी पहली पुस्तक का लोकार्पण मुंबई के व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल में किया। इस अवसर पर प्रसिद्ध फिल्म निर्माता सुभाष घई, गायक सुखविंदर सिंह और संगीतकार शिवमणि भी उपस्थित थे।


नवीन कुमार ने पहले भी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'धुरंधर' में बांसुरी बजाई है। उन्होंने कहा कि यह किताब उनकी संगीत यात्रा को दर्शाती है, जिसमें उनके वर्षों का अभ्यास और बांसुरी के प्रति उनका गहरा जुड़ाव शामिल है। विमोचन समारोह में उन्होंने बांसुरी पर लाइव प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने फिल्म 'हीरो' के गाने 'तू ही रे' और 'धुरंधर 2' के एक विशेष अंश को प्रस्तुत किया।


कार्यक्रम में शिवमणि और नवीन कुमार की जुगलबंदी ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा। शिवमणि की ताल और नवीन की बांसुरी की धुन ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद, सुखविंदर सिंह ने 'कृष्णा' गीत की शानदार प्रस्तुति दी।


सुभाष घई ने नवीन कुमार की कला की सराहना करते हुए कहा कि सच्ची कला जुनून और समर्पण से उत्पन्न होती है। उन्होंने इस पुस्तक को सभी कलाकारों के लिए प्रेरणादायक बताया।


नवीन कुमार ने अपने दिवंगत माता-पिता को अपनी प्रेरणा बताया और कहा कि वे एक साधारण सांस्कृतिक परिवार से हैं। उन्होंने अपनी पत्नी किरण और बच्चों राहेल नवीन व जीन नवीन का भी आभार व्यक्त किया।


उन्होंने पुस्तक के संपादन में मदद करने वाली उषा श्रीनिवासन शाहणे का विशेष धन्यवाद किया और प्रकाशक आकाश भाबट का भी आभार जताया, जिन्होंने इस पुस्तक को प्रकाशित करने में सहायता की। नवीन कुमार ने कहा कि सुभाष घई ने हमेशा बिना किसी पूर्व परिचय के उनका मार्गदर्शन किया।


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