क्या है अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा की सिनेमा पर अनोखी राय? जानें दिल्ली शब्दोत्सव में उनके विचार
अखिलेंद्र मिश्रा का सिनेमा और समाज पर दृष्टिकोण
नई दिल्ली, 4 जनवरी। फिल्मों और टेलीविजन में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाने वाले अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। 'लगान' में उनके द्वारा निभाए गए लोहार का किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में बसा हुआ है। दिल्ली शब्दोत्सव में एक विशेष बातचीत के दौरान, उन्होंने अभिनेता की असली परिभाषा साझा की। उनके अनुसार, अभिनेता समाज का एक दर्पण होता है।
अखिलेंद्र ने कहा कि अभिनेता का मतलब केवल सेल्फी लेना या ऑटोग्राफ देना नहीं है, बल्कि समाज के प्रति भी कुछ जिम्मेदारियां होती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आज का सिनेमा साहित्य से दूर होता जा रहा है। अगर हम पढ़ाई नहीं करेंगे, तो अच्छी फिल्में कैसे बनाएंगे? हिंदी सिनेमा में कई लेखक ऐसे हैं, जिन्हें हिंदी शब्दों का ज्ञान नहीं है, फिर भी वे अंग्रेजी में स्क्रिप्ट लिख रहे हैं।
गानों और संगीत पर चर्चा करते हुए, उन्होंने कहा कि आजकल अच्छे गाने सुनने को नहीं मिलते और पुराने गानों को रीमिक्स करके पेश किया जा रहा है। 40 और 50 साल पहले के गाने सुर, लय और ताल से भरे होते थे, जबकि आज के गानों में लिरिक्स का कोई महत्व नहीं रह गया है। यही कारण है कि पुराने गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
समाज और सिनेमा के संबंध में, उन्होंने कहा कि पहले समाज में जो हो रहा था, उसे फिल्में दर्शाती थीं, लेकिन अब सिनेमा समाज को प्रभावित कर रहा है। समाज को यह तय करना होगा कि कौन सी फिल्में देखनी हैं और बच्चों को कौन सी फिल्में दिखानी चाहिए। सिनेमा का प्रभाव आज के युवाओं पर बहुत गहरा है।
बॉलीवुड सितारों की जिम्मेदारी पर बात करते हुए, उन्होंने कहा कि अगर आप बोलने के लिए मुंह खोलते हैं, तो हर मुद्दे पर अपनी राय रखनी चाहिए।
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