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क्या मिलिंद चंदवानी का अनुभव आरक्षण पर नई बहस को जन्म देगा?

अभिनेता अविका गौर के पति मिलिंद चंदवानी का एक वायरल वीडियो आरक्षण प्रणाली पर नई बहस को जन्म दे रहा है। उन्होंने अपने कॉलेज के अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे आरक्षण का लाभ उठाने वाले कुछ छात्रों को इसकी जानकारी नहीं होती। मिलिंद ने यह भी कहा कि यदि आरक्षण को हटाना है, तो पहले सभी बच्चों को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। इस वीडियो के माध्यम से वे 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' के संदर्भ में भी अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। जानें उनके विचार और इस मुद्दे पर देशभर में चल रही चर्चाओं के बारे में।
 

आरक्षण पर मिलिंद चंदवानी का विचार


मुंबई, 28 जुलाई। हाल ही में अभिनेत्री अविका गौर के पति और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मिलिंद चंदवानी का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे आरक्षण प्रणाली पर अपने विचार साझा कर रहे हैं। मिलिंद, जो आईआईटी-आईआईएम के पूर्व छात्र हैं, ने अपने कॉलेज के दिनों का एक अनुभव साझा किया।


वीडियो में, मिलिंद ने बताया कि 2013 में उनके एक मित्र ने उनसे कहा था, 'तुमने 98.5 प्रतिशत लाकर क्या हासिल किया?' उस समय, उन्हें आईआईएम से कोई कॉल नहीं आ रहा था, जबकि उनके दोस्त को केवल 58 प्रतिशत लाने पर कॉल मिल रहे थे। दोनों ही मिडिल क्लास परिवार से थे। उन्होंने कहा कि उस समय यह देखकर उन्हें बहुत बुरा लगा और आरक्षण प्रणाली पर कई सवाल उठे।


मिलिंद ने आगे कहा, 'जब मैं 'टीच फॉर इंडिया' से जुड़ा और सरकारी स्कूलों के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया, तब मेरी सोच में बदलाव आया। मैंने देखा कि जिन बच्चों को वास्तव में आरक्षण की आवश्यकता है, उन्हें इसके लाभ उठाने की जानकारी नहीं है।'


उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे यह नहीं कह रहे कि आरक्षण का लाभ उठाने वाले सभी लोगों को इसकी आवश्यकता नहीं होती। कई ऐसे लोग हैं जिन्हें इसकी सच में जरूरत है। मिलिंद ने जाति आधारित आरक्षण के पक्ष या विपक्ष में अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की, लेकिन कहा कि यदि कभी इसे हटाना है, तो पहले कम आय वर्ग के बच्चों को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करनी होगी।


यह वीडियो उस समय आया है जब सोशल मीडिया पर 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' काफी चर्चा में है। इस अभियान के तहत आरक्षण प्रणाली में बदलाव की मांग की जा रही है। देशभर में इस मुद्दे पर विभिन्न राय सामने आ रही हैं। कुछ लोग आरक्षण में बदलाव की मांग कर रहे हैं, जबकि अन्य का मानना है कि सामाजिक और आर्थिक असमानता समाप्त होने तक आरक्षण आवश्यक है।


भारत में आरक्षण प्रणाली का उद्देश्य सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना है। इसका लक्ष्य उन समुदायों को अवसर देना है, जो लंबे समय से भेदभाव और संसाधनों की कमी का सामना कर रहे हैं। हालांकि, समय के साथ इसके लाभ, सीमाएं और आवश्यकता पर बहस जारी है।


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