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क्या नसीरुद्दीन शाह के मामले में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने उठाई आवाज़? जानें पूरी कहानी!

बरेली में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के एक कार्यक्रम में शामिल न होने के विवाद पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने इसे सांप्रदायिकता का संकेत बताया और योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा की। जानें इस मामले में उन्होंने क्या कहा और किस तरह से यह विवाद बढ़ा।
 
क्या नसीरुद्दीन शाह के मामले में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने उठाई आवाज़? जानें पूरी कहानी!

नसीरुद्दीन शाह के कार्यक्रम में विवाद


बरेली, 5 फरवरी। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह से जुड़े एक हालिया विवाद पर अपनी राय व्यक्त की है। दरअसल, नसीरुद्दीन शाह को एक विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें शामिल नहीं किया गया। आयोजकों का कहना है कि अभिनेता ने खुद कार्यक्रम में भाग लेने से मना कर दिया था।


इस मामले में दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। मौलाना रजवी ने इस स्थिति की निंदा करते हुए कहा कि यदि नसीरुद्दीन शाह के साथ ऐसा हुआ है, तो यह सांप्रदायिकता या कट्टरता का संकेत है। उन्होंने कहा, "नसीरुद्दीन शाह भारत में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं और उनकी बातों को सुनना चाहिए। किसी भी चीज को देशद्रोह के दायरे में नहीं लाना चाहिए।"


उन्होंने आगे कहा, "यदि कोई सरकार की आलोचना करता है, तो यह संविधान के तहत आता है। इसे देशद्रोह नहीं कहा जा सकता। लेकिन अगर नसीरुद्दीन शाह के कार्यक्रम की आलोचना की जाती है, तो यह सांप्रदायिकता का संकेत है।"


मौलाना ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सीएम योगी मुसलमानों को परेशान नहीं करते और विकास पर ध्यान केंद्रित करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में मुसलमान योगी आदित्यनाथ को पसंद करते हैं।


उन्होंने यह स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री ने मदरसों को बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया है और न ही किसी प्रकार की रोकथाम की है।


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