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क्या 'धमाल 4' ने हंसी का जादू फिर से बिखेरा? जानें इस कॉमेडी का असली मज़ा!

धमाल 4, जो कि सात साल के लंबे इंतज़ार के बाद आई है, दर्शकों को हंसाने के लिए तैयार है। इस फिल्म में अजय देवगन, संजय मिश्रा, और अरशद वारसी जैसे सितारे हैं, जो एक खज़ाने की खोज में जुटे हैं। फिल्म का उद्देश्य गंभीरता नहीं, बल्कि मनोरंजन है। क्या यह फिल्म दर्शकों को हंसाने में सफल होगी? जानने के लिए पढ़ें पूरा रिव्यू!
 

हंसी की दवा: 'धमाल 4' का मजेदार सफर


कहते हैं कि हंसी सबसे बेहतरीन दवा है, और जब काम का तनाव बढ़ जाता है, तो बेतुकी कॉमेडी ही सबसे अच्छा सहारा बनती है। निर्देशक इंद्र कुमार की *धमाल 4* इसी विचार के साथ सिनेमाघरों में आई है - "कोई लॉजिक नहीं, बस भरपूर एंटरटेनमेंट"। सात साल के लंबे इंतज़ार के बाद, यह फ़िल्म 10 जुलाई, 2026 को रिलीज़ हुई। सरल शब्दों में कहें तो, इस फ़िल्म का उद्देश्य गंभीर संदेश देना नहीं है; बल्कि यह अपनी कॉमिक टाइमिंग और यादगार पात्रों के माध्यम से आपके वीकेंड को मजेदार बनाना चाहती है। लेकिन क्या सात साल बाद भी ये अजीबोगरीब हरकतें दर्शकों को हंसा पाएंगी? क्या यह बेतुकी कहानी दर्शकों को उनके पैसे की पूरी कीमत देगी? जानने के लिए पूरा रिव्यू पढ़ें!


कहानी का सार

इस बार की कहानी एक प्राचीन और अजीब इतिहास से जुड़ी है। लगभग सौ साल पहले, 'शैतान सिंह' नामक एक खतरनाक समुद्री डाकू ने एक द्वीप पर अरबों का खज़ाना छिपाया था। वर्तमान समय में, इस खज़ाने का नक्शा केवल पृथ्वी देशपांडे (उपेंद्र लिमये) के पास है। फिर डाकू 'अधूरा' (रवि किशन) की एंट्री होती है; वह पृथ्वी से नक्शा चुराने में सफल होता है, लेकिन अपनी बदकिस्मती से नक्शा खो देता है। अब, गुड्डू (अजय देवगन) खज़ाने की खोज में शामिल होता है; वह पृथ्वी को बचाने के लिए अधूरा के जहाज़ पर चढ़ता है, जबकि उसका असली मकसद खुद खज़ाना हासिल करना होता है।


इसके बाद शुरू होती है अफरा-तफरी! कहानी में एक बड़ा मोड़ आता है: गुड्डू और उसका साथी जॉनी (संजय मिश्रा), पुरानी गैंग - आदि और मानव (अरशद वारसी और जावेद जाफ़री), रोज़ी (संजीदा शेख), और लल्लन-पारो (रितेश देशमुख और अंजलि आनंद) - सभी खज़ाने की खोज में जुट जाते हैं। क्या ये अजीबोगरीब किरदार खज़ाना ढूंढ पाएंगे या द्वीप पर मौजूद खतरनाक जीवों के बीच फंस जाएंगे? यह जानने के लिए आपको 'धमाल 4' देखनी होगी।


फिल्म का अनुभव

इंद्र कुमार को अच्छी तरह पता है कि 'धमाल' के प्रशंसक सिनेमाघर में क्या देखने आते हैं। इसलिए उन्होंने फ़िल्म के पहले भाग में एंटरटेनमेंट, एक्शन और रोमांस का ऐसा बेहतरीन मिश्रण तैयार किया है कि आप अपनी सीट से हिलना भी नहीं चाहेंगे। फ़िल्म में मजेदार मीम्स और पुरानी बॉलीवुड फ़िल्मों के मेटा-रेफरेंस भी हैं, जो आज की पीढ़ी को ज़रूर पसंद आएंगे। इसके अलावा, फ़िल्ममेकर्स पुरानी फ़िल्मों के सीन को दोबारा दिखाकर नॉस्टैल्जिया जगाते हैं, जिससे दर्शकों के लिए एक इमोशनल पहलू भी जुड़ जाता है।


हालांकि, असली चुनौती इंटरवल के बाद आती है। जैसे-जैसे फ़िल्म क्लाइमैक्स की ओर बढ़ती है, इसकी गति थोड़ी धीमी हो जाती है, लेकिन बाद में यह फिर से पटरी पर आ जाती है। कॉमेडी फ़िल्म होने के नाते, इसमें ज़बरदस्त और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए सीन का होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। फ़िल्म के अंत में लल्लन-पारो की कहानी में ज़बरदस्ती डाले गए मेलोड्रामा और इमोशनल ट्विस्ट से बचा जा सकता था।


निर्देशन और अभिनय

इस फ़िल्म को बनाने में, निर्देशक इंद्र कुमार ने हर संभव तत्व को शामिल किया है। इस फ़िल्म में आपको स्लैपस्टिक कॉमेडी, खजाने की खोज, समुद्री लुटेरे, भूतिया एंगल और खतरनाक जीवों की पूरी कहानी देखने को मिलती है। उनका विज़ुअल स्टाइल वाइब्रेंट और रंगीन है, जो बड़े पर्दे पर मजेदार अनुभव देता है। हालांकि, भूतिया हवेली वाले सीन के दौरान निर्देशन थोड़ा फीका लगा।


एक्टिंग की बात करें तो अरशद वारसी और जावेद जाफरी (आदि और मानव) इस फ़्रैंचाइज़ी की जान हैं। जब भी वे स्क्रीन पर आते हैं, तो थिएटर हंसी से गूंज उठता है। अजय देवगन और संजय मिश्रा (गुड्डू और जॉनी) की जोड़ी भी मजेदार हंगामा खड़ा करती है। रितेश देशमुख और अंजलि आनंद (लल्लन और पारो) ने फ़िल्म में बेहतरीन किरदार निभाए हैं।


संगीत और निष्कर्ष

म्यूज़िक की बात करें तो वायरल मराठी गाने 'गुलाबी साड़ी' और भोजपुरी ट्रैक 'चटनी' के नए हिंदी वर्ज़न का सही समय पर इस्तेमाल किया गया है। 'गुलाबी साड़ी' का नया वर्ज़न इतना शानदार है कि थिएटर से निकलने के बाद भी आपके दिमाग में बसा रहता है।


कमज़ोर हॉरर एंगल और ज़्यादा इमोशनल क्लाइमेक्स के बावजूद, अगर आप 'धमाल 4' देखने का प्लान बना रहे हैं, तो अपनी लॉजिक को घर पर छोड़ दें। यह फ़िल्म आपको हंसाने के लिए है, और पहले भाग में आपको ज़ोर-ज़ोर से हंसाएगी। फिर भी, आदि-मानव की जोड़ी और रितेश व अजय का स्वैग इस फ़िल्म को 'पैसा वसूल' अनुभव बनाता है।


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